होलकर राजपरिवार में रिचर्ड होलकर के बेटे यशवंतराव होलकर का राजतिलक कर उन्हें इंदौर का महाराज घोषित करने का मामला विवादों में पड़ गया है। इसे लेकर महेश्वर में व्यवहारवाद लगाया गया है और प्रक्रिया को गलत ठहराया गया है। इसके लिए जाहिर सूचना भी प्रकाशित की गई है।
अशुंमतराव होलकर ने वकील अभिजित दुबे के जरिए इस राजतिलक पर आपत्ति महेश्वर में लगाई है। उनका कहना है कि वर्ष 1962 में भारत सरकार द्वारा उषादेवी होलकर को महारानी के रूप में मान्यता दी गई थी। 1971 में 26वें संविधान संशोधन के बाद शाही उपाधियां समाप्त कर दी गईं। भारतीय स्वतंत्रता के बाद सभी रियासतों का विलय भारत सरकार में हो चुका है और अब ऐसे राजवंशों की स्थिति केवल औपचारिक मानी जाती है। फिर इस तरह की घोषणा का कोई औचित्य नहीं है।
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उन्होंने जाहिर सूचना में यह भी कहा कि होलकर राज को लेकर इंदौर सीविल प्रक्रिया संहिता में कहीं भी रिचर्ड होलकर या उनकी माता के नाम का उल्लेख नहीं है।इस मामले में हाल ही में इंदौर के महाराजा घोषित किए गए यशवंतराव होलकर की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
आपको बता दें कि होलकर राजपरिवार के उत्तराधिकारी को लेकर महारानी उषा राजे ने यशवंत राव होलकर को होलकर राजपरिवार का उत्तराधिकारी और उनकी बहन सबरिना राजे को राजकुमारी की उपाधि दी है। रामनवमीं के दिन एक कार्यक्रम घोषित कर दोनों का राजतिलक किया गया। जिसमें होलकर राजवंश से जुड़े सदस्यों को बुलाया गया था। वे पारंपरिक परिधानों में राजवाड़ा के मल्हार मंदिर में आए और उन्होंने यशवंत राव व सबरिना का राजतिलक किया। उन्हें पान सुपारी देकर होलकरी पताका भेंट की गई थीं।
