इंदौर के भागीरथपुरा में डायरिया व हैजा फैले सवा माह बीत चुके हैं। दूषित पानी के कारण 35 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक उनकी ठोस वजह पता नहीं चली है। इस मामले में तीन जांच कमेटियां बन चुकी हैं। कोर्ट के निर्देश पर भी एक कमेटी गठित हो चुकी है, लेकिन अभी तक एक भी जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इस मामले में लगी याचिका की सुनवाई के दौरान मृतकों की पोस्टमार्टम व विसरा रिपोर्ट को लेकर भी कोर्ट पूछ चुका है, लेकिन अफसर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।

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भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण जब अलग-अलग अस्पतालों में मरीज आना शुरू हुए थे तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में अफसरों की बैठक ली थी। वे अस्पतालों में मरीजों से मिलने गए थे। तब उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। मामला जब गरमाने लगा तो सरकार ने निगमायुक्त दिलीप कुमार को हटा दिया। इसके बाद सरकार ने दो एसीएस को जांच के लिए इंदौर भेजा। बाद में सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी भी गठित की और इसकी जानकारी कोर्ट में भी प्रस्तुत की, लेकिन अभी तक एक भी कमेटी की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। अब कोर्ट ने भी एक कमेटी जांच के लिए गठित की है।

अब तक क्या हुआ



  • भागीरथपुरा कांड का मामला देशभर में उछला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी बस्ती में पहुंचे और मृतकों के परिवार से मुलाकात की।




  • कोर्ट में इस मामले में याचिका लगी। अब तक 35 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन कोर्ट ने डायरिया से 16 मौतों को ही माना।




  • बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में नई नर्मदा लाइन से सप्लाई हो रही है। बचे हिस्सों में लाइन बिछाने का काम जारी है।




  • बस्ती के छह सौ से ज्यादा लोगों का इलाज अस्पतालों में हुआ है, जबकि डेढ़ हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।




  • बीते पंद्रह दिन से जो मौतें हो रही हैं, उनकी वजह स्वास्थ्य विभाग अब डायरिया नहीं मान रहा है।




  • इस मामले में पांच अफसरों को निलंबित किया गया है, लेकिन अभी तक किसी पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है।





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