इंदौर के ब्रजेश्वरी अग्निकांड में आग लगने के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कार के चार्जिंग प्वाइंट में लगी आग से मकान जला, जबकि मृतक मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ का दावा है कि कार चार्ज नहीं हो रही थी और बिजली के पोल के कारण आग लगी। बिजली कंपनी का कहना है कि यदि पोल से आग लगी होती तो पहले धमाका होता और इलाके की बिजली गुल हो जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पोल के पास कार खड़ी थी, जिससे पोल की केबलें जलीं और चिंगारियां उठीं।

 

प्रारंभिक वीडियो में पहले कार जलती हुई दिखाई दे रही है और उसके बाद पोल में आग लगती नजर आती है। पोल की आग से पहली मंजिल पर जालियों पर लगा प्लास्टिक जला और आग दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। फिलहाल इस अग्निकांड की जांच जारी है और रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि आग पर काबू पाने के प्रयासों में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है।

 

पुलिस और फायर ब्रिगेड की शुरुआती जांच में मकान में आग लगने की मुख्य वजह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की चार्जिंग के दौरान हुआ शॉर्ट सर्किट माना गया है। चार्जिंग के समय अचानक चिंगारी भड़की, जिससे वाहन में आग लगी और कार की बैटरी में भी विस्फोट हुए। हालांकि सौरभ का कहना है कि कार चार्जिंग पर नहीं थी और आग बिजली के पोल के कारण लगी।

बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री डी.के. तिवारी के अनुसार ट्रांसफार्मर ऑनलाइन सर्वर से जुड़ा है और डेटा के अवलोकन में यह पाया गया कि आग पहले बिजली पोल पर नहीं लगी। यदि ऐसा होता तो शॉर्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर का फेज उड़ जाता और क्षेत्र की बिजली स्वतः बंद हो जाती, जबकि ऐसा नहीं हुआ। मकान में आग लगने के बाद ही बिजली विभाग ने आपूर्ति बंद की। वहीं पुलिस की फोरेंसिक जांच में ईवी कार और चार्जिंग से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए हैं, हालांकि आग बुझाने के दौरान कई सबूत नष्ट हो गए।

इन लापरवाहियों के कारण फैली आग



  • मकान में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जा सका।




  • चारों तरफ लगी लोहे की जालियों के कारण दमकलकर्मियों को भीतर पहुंचने में कठिनाई हुई।




  • फायर ब्रिगेड की गाड़ियां देरी से पहुंचीं और शुरुआत में केवल एक दमकल ही मौके पर थी, जबकि आग काफी बड़ी थी।




  • आग लगने के बाद स्थानीय लोग करंट के डर से बुझाने के प्रयास नहीं कर सके।




  • गली में खड़ी गाड़ियों को समय पर नहीं हटाया गया, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ।





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