दस माह पहले आदेश देने के बावजूद इंदौर के बीआरटीएस के रैलिंग और बस स्टॉप अभी तक नहीं हट पाए हैं। इसे लेकर कोर्ट नाराज है। सोमवार को सुनवाई में कोर्ट ने अफसरों को देरी को लेकर आगाह किया और आदेशों को गंभीरता से लेने की बात कही।

 

हाईकोर्ट में बीआरटीएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अफसर कोर्ट के आदेशों को हल्के में ले रहे हैं। यदि ऐसा है तो फिर कड़ा एक्शन भी हो सकता है। अफसरों ने कहा कि बीआरटीएस के एक तरफ के रैलिंग हटाए जा चुके हैं। अभी जंक्शनों पर ब्रिज बनाने की योजना है। डिवाइडरों को बनाने के टेंडर भी जारी हो चुके हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि रैलिंग नहीं हटाने को लेकर अफसर बहानेबाजी कर रहे हैं। ब्रिज बनाने की योजना अभी कागजों पर ही है। अब एलिवेटेड ब्रिज बनाने की योजना पर भी बैठक में चर्चा हुई थी।

 

कोर्ट के समक्ष सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल भी मौजूद रहे। बीआरटीएस हटाने की निगरानी को लेकर कोर्ट ने एक कमेटी भी गठित की है। गत दिनों कमेटी के सदस्यों ने बीआरटीएस का दौरा किया था। सदस्यों ने पाया कि एक तरफ के रैलिंग ही हटाए गए हैं और बस स्टॉप हटाने का काम काफी धीमी गति से हो रहा है। कमेटी ने अपनी तरफ से रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर दी है।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री ने पिछले साल बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया था और नगर निगम ने हाईकोर्ट से बीआरटीएस हटाने की अनुमति दी थी, लेकिन दस माह बाद भी साढ़े 11 किलोमीटर के रैलिंग नहीं हट पाए हैं। इसे लेकर कोर्ट पहले भी नाराजगी जता चुका है।



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