धार और झाबुआ जिले व गुजरात दाहोद के आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण छोटा उदयपुर रेलवे परियोजना का अलाइनमेंट बार-बार बदला जा चुका है। इस कारण अभी तक इस परियोजना का फायदा आदिवासी अंचल को नहीं मिल पाया है, जबकि तिरला से टांडा व अलीराजपुर में 60 किलोमीटर से भी कम लंबाई का काम शेष है। वन विभाग की जमीन भी अभी तक रेलवे को नहीं मिल पाई है। यदि सिंहस्थ से पहले यह परियोजना पूरी होती है तो गुजरात व महाराष्ट्र के यात्रियों को इसका फायदा मिल सकता है।

 

धार के समीप तिरला में इंदौर-दाहोद और धार-छोटा उदयपुर रेल परियोजना आकर मिलेगी। भविष्य में तिरला रेलवे के नक्शे पर बड़ा जंक्शन बनेगा। शिलान्यास के समय छोटा उदयपुर-धार रेल लाइन प्रोजेक्ट की लंबाई 157 किलोमीटर थी, जो नए अलाइनमेंट के बाद 145 किमी रह गई है। यह प्रोजेक्ट इंदौर के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह लाइन इंदौर को धार, छोटा उदयपुर होते हुए वडोदरा तक शॉर्ट कट कनेक्टिविटी देगी।

 

अभी इंदौर से वडोदरा जाने के लिए उज्जैन-रतलाम-दाहोद-गोधरा होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। छोटा उदयपुर के जरिए मुंबई-गुजरात से सीधे इंदौर का जुड़ाव होगा। वडोदरा की दूरी अभी इंदौर से 430 किमी है, लेकिन धार और छोटा उदयपुर के नए मार्ग से यह सिर्फ 310 किमी रह जाएगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह रूट तैयार होने पर वडोदरा-इंदौर जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर में यात्रा समय कम होगा और माल परिवहन भी तेज होगा।

 

रेलवे मामलों के जानकार नागेश नामजोशी ने कहा कि छोटा उदयपुर रेल परियोजना कई आदिवासी व ग्रामीण इलाकों को भारतीय रेल के मुख्य नेटवर्क से जोड़ने वाली है। नई रेल लाइन गुजरने से छोटा उदयपुर, अलीराजपुर और धार जिलों को सीधा रेल कनेक्शन मिलेगा, जिससे इन क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इसका अलाइनमेंट बार-बार बदले जाने से काम में देरी हुई है। इस परियोजना को पूरा करने पर रेल विभाग को प्राथमिकता देनी चाहिए।



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