इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल कांड की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं की एंट्री होने के बाद तय माना जा रहा था कि इस मामले में कोई सख्त एक्शन लिया जा सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने इस कांड के बाद भाजपा सरकार की घेराबंदी तेज कर दी थी। मंत्री विजयवर्गीय के पत्रकार के साथ हुए घटनाक्रम ने मामले को और तूल दे दिया था। मामले का पटाक्षेप करने के लिए सरकार का यह एक्शन जरूरी माना जा रहा था। सूत्रों के अनुसार शनिवार को भी इस मामले में चौंकाने वाला फैसला हो सकता है।
उधर इंदौर से भोपाल पहुंचे एसीएस संजय दुबे ने भी मुख्यमंत्री को इंदौर से लौटने के बाद अफसरों की लापरवाही और तालमेल गड़बड़ाने का फीडबैक दिया। आखिरकार रात को मुख्यमंत्री मोहन यादव को सोशल मीडिया पर अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित करने और निगमायुक्त को हटाने की जानकारी देनी पड़ी। जबलपुर के दौरे से लौटने के बाद उन्होंने रात को अफसरों के साथ वीडियो काॅफ्रेंस की थी। जिसमे उन्होंने निगमायुक्त को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कई मामलों में सख्त एक्शन लेकर यह संदेश दे चुके थे कि प्रशासनिक लापरवाही के प्रति उनका रवैया सख्त रहता है। एरोड्रम ट्रक हादसे के बाद भी उन्होंने डीसीपी सहित टीआई और कई अफसरों को हटाया, लेकिन इंदौर में हुए दूषित पेयजल कांड के मामले में वैसी सख्ती नजर नहीं आई, जबकि मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मामले में अपर आयुक्त की देरी को घेरे में ले चुके थे। इसके अलावा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी कह चुके थे कि उन्होंने खुद भागीरथपुरा में दूषित पानी के मामले में निगामायुक्त को मैसेज किए थे।
भाजपा की अंदरूनी कलह भी सामने आई। इस घटना के बहाने भाजपा जनप्रतिनिधियों ने जनता तक यह मैसेज पहुंचा दिया था कि अफसर सहयोग नहीं कर रहे हैं और वे जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनते। इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी विकास कार्यों की बैठक में मुख्यमंत्री से कह चुके थे कि अफसर उनके नाम से चमकाते हैं। इससे पहले संपत्तियों की जांच के मामले में भी जनप्रतिनिधियों ने अफसरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया था। तब निगमायुक्त के खिलाफ नारेबाजी भी थाने में हुई थी। यदि इस बार भी निगमायुक्त नहीं हटते तो यह सवाल उठता कि उन्हें क्यों बचाया जा रहा है।
