इंदौर चायनीस डोर से इंदौर में शरीर के अंग कटने की घटनाएं हो रही है। एक युवक की मौत भी हो चुकी है, लेकिन यह डोर पतंगबाज के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसे लेकर एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने टीमें तैयार की है, जो लाइनों के आसपास पतंग उड़ाने वालों पर नजर रखेगी। कंपनी ने 9 इलाके भी चिन्हित किए है, जहां चायनसीस मांझे के कारण बिजली गुल होने व करंट लगने की घटनाएं हो चुकी है।

 

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के टीमें तैयार की है और जागरुकता अभियान भी जलाया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंगों के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आया। इससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं।

 

इन इलाकों में उड़ती है ज्यादा पतंग

कंपनी ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ ज्यादा पतंग म उड़ाई जाती है। इन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर लगाए गए है। लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड में पूर्व में मांझे के कारण बिजली गुल होने की घटनाएं हो चुकी है। अफसरों ने बताया कि चायनीज मांझा सामान्य सूती धागे से अलग होता है।

विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है।



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