काशी में देवी अहिल्या द्वारा बनाए गए मणिकर्णिका महाश्मशान घाट को प्रशासन ने तुड़वा दिया है। घाट पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा भी तोड़ दी गई है। इससे नाराज काशी के मराठीभाषी और पाल समाज के लोग विरोध दर्ज कराने मौके पर पहुंचे। जब इसकी जानकारी इंदौर के मराठीभाषियों को मिली तो उन्होंने इसका विरोध जताया और दोषियों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की है। इसे लेकर एक आंदोलन की तैयारी भी की जा रही है और 15 जनवरी को एक बैठक भी आयोजित की गई है।
घाट के पुनर्विकास के नाम पर कार्यदायी संस्था ने पत्थरों को तोड़ना शुरू कर दिया। उन्हें तोड़ने के लिए भी पोकलेन की मदद ली गई। मलबा देख पाल और मराठीभाषी परिवार मौके पर पहुंचे और उन्होंने 300 साल पुराने घाट के बेतरतीब तरीके सेे तोड़ने का विरोध जताया।
इसकी जानकारी मिलने के बाद मौके पर पुलिस अधिकारी भी पहुंचे। घाट पर पर लगे मणी और देवी अहिल्या की प्रतिमा और शिवलिंग तोड़े जाने से नाराज थे। पूर्व पार्षद सुधीर देड़गे ने कहा कि देवी अहिल्या ने देश के कई शहरों में घाट और मंदिर बनाए है। काशी में घाट तोड़ना गलत है। इसे लेकर धनगर समाज, पाल समाज व अन्य उपजातियों के प्रतिनिधियों की बैठक 15 जनवरी को बुलाई गई है। जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
