राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला के तहत इंदौर के श्रीनगर बस्ती में ‘हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नन्हे-मुन्ने बच्चों और मातृ शक्तियों ने सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशात्मक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में मातृ शक्ति संत अनादी सरस्वती ने अपने उद्बोधन में समाज को जागृत होने का आह्वान किया और बच्चों में सुसंस्कृत राष्ट्रभक्ति के विकास पर जोर दिया। लेखिका एवं शिक्षिका अमिता झा ने कुटुंब प्रबोधन और पंच परिवर्तन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

इनको बताया गया हिंदू


मुख्य वक्ता एवं संघ के प्रवक्ता कीर्तिश धामारीकर शास्त्री ने अपने संबोधन में संघ के 100 वर्षों के इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र का विचार संघ की आत्मा है। हर वह व्यक्ति जो भारत के धार्मिक स्थलों, महापुरुषों, नदियों, गौ माता और इस देश को मां के रूप में पूजता है, वह हिंदू है, भले ही उसकी पूजा पद्धति या स्वरूप कुछ भी क्यों न हो।

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उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ की स्थापना किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से हुई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 के आसपास कांग्रेस में दो धाराएं उभरकर सामने आई थीं। नरम दल और गरम दल। अधिकांश कांग्रेसी नरम दल के पक्ष में थे, जबकि आम जनता गरम दल की विचारधारा का हृदय से समर्थन कर रही थी।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के पूजन एवं आरती के साथ हुई। वंदे मातरम् से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया और जन-गण-मन के साथ समापन हुआ। सम्मेलन में हजारों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। 





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