इंदौर में मंगलवार को बैंककर्मियों ने हड़ताल की। वे चाहते हैं कि दूसरे सरकारी विभागों की तरह पांच दिन कार्यदिवस हो। उन्होंने अन्य मांगें भी पूरी नहीं होने की बात कही। हड़ताल के कारण बैंकों का कामकाज प्रभावित रहा और करोड़ों के लेनदेन अटके रहे। दोपहर में बैंक कर्मचारियों ने जिला कोर्ट के पास से रैली निकाली और गांधी हॉल पर जाकर प्रदर्शन किया। नारेबाजी कर उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। इस हड़ताल का बैंक की डिजिटल सेवाओं पर असर नहीं पड़ा।
बैंक उद्योग के सभी नौ अधिकारी-कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों व सहकारी बैंकों के 8 लाख से अधिक संगठित बैंककर्मी मंगलवार को हड़ताल पर रहे।
इंदौर में कुल 848 बैंक शाखाओं में कुछ निजी बैंकों के अलावा 700 से अधिक शाखाएं बंद रहीं। चार हजार से अधिक बैंककर्मी हड़ताल पर रहे। बैंककर्मी दोपहर में जिला कोर्ट के सामने पहुंचे और वहां से गांधी हॉल तक रैली निकाली। इसके बाद बैंककर्मियों ने नारे लगाकर प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर क्रांतिकारी गीत भी गाए गए। हड़ताली बैंककर्मियों की सभा को यूनियनों के पदाधिकारी मोहन कृष्ण शुक्ला, कन्हैया पाटीदार, पंकज पोरवाल, अरविंद पोरवाल, मीनेश कसेरा आदि ने संबोधित किया। सभा में कहा गया कि केंद्र व राज्य के सरकारी कार्यालय शनिवार व रविवार बंद रहते हैं।
रिजर्व बैंक, स्टॉक एक्सचेंज के लेनदेन भी शनिवार-रविवार को नहीं होते हैं। इस कारण बैंकों में भी पांच दिन के कार्यदिवस किए जाने चाहिए। सभा का संचालन रामदेव सायडीवाल ने किया और अंत में नवीन मोदी ने आभार माना। बैंककर्मियों को फिलहाल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश दिया जाता है। अब चारों सप्ताह शनिवार को अवकाश की मांग उठ रही है। हड़ताल पर जाने की मुख्य मांग यही रही है।
