इंदौर में इस बार होली का उत्साह कुछ अलग अंदाज में देखने को मिल रहा है। शहरवासियों ने सोमवार को उल्लास के साथ पांच सौ से ज्यादा स्थानों पर होलिका दहन किया था, लेकिन धुलेंडी के पर्व के लिए एक दिन का विराम लेना पड़ा। इसकी वजह  मंगलवार को लगा चंद्रग्रहण रहा। ग्रहण और उसके सूतक काल के चलते शहर में मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा और रंगों की होली नहीं खेली गई।

 

मंगलवार दोपहर 3.21 बजे से शाम 6.47 बजे तक चंद्रग्रहण का प्रभाव रहा। ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले ही सूतक काल लग गया था, जिसके चलते लोगों ने धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए स्वयं को रंगों से दूर रखा। यहां तक कि गलियों में बच्चों की टोलियां भी नजर नहीं आईं।

ग्रहण समाप्त होने के बाद अब बुधवार को पूरे शहर में धुलेंडी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दौरान शहर भर में रंग-गुलाल उड़ेंगे और फाग गीतों के साथ होली मिलन समारोहों का दौर शुरू होगा।

 

परंपरा के अनुसार, जिन परिवारों में बीते वर्ष किसी सदस्य का निधन हुआ है, वहां रिश्तेदार और परिचित बुधवार को ही शोक निवारण के लिए रंग डालने पहुंचेंगे। इंदौर की पुरानी यादों में कड़ाव घाट की होली का अपना एक विशेष महत्व रहा है। यहां चौराहे पर रंगों से भरा एक बड़ा कड़ाव रखा जाता था, जिसमें राहगीरों को पकड़कर डालने की अनूठी परंपरा थी। हालांकि शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी परंपराएं वर्षों तक प्रचलित रहीं, लेकिन कड़ाव घाट की होली की चर्चा आज भी खास तौर पर की जाती है।



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