इंदौर में कमर्शियल गैस सिलिंडरों की बुकिंग शुरू होने की बात तो कही जा रही थी, लेकिन इसे लेकर अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं। मंगलवार को भी गैस सिलिंडरों की किल्लत बरकरार रही। बड़े होटल और रेस्टोरेंट्स ने तो इंडक्शन जैसे विकल्प अपना लिए हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों, ठेले-गुमटियों पर खान-पान का सामान बेचने वालों के लिए यह स्थिति संकट बन गई है। अब सड़कों पर उनकी कमी साफ दिखाई देने लगी है। चाय, पानी बताशे, चाउमीन और चाट के ठेले पहले जितने नजर आते थे, अब उतने दिखाई नहीं देते, क्योंकि उन्हें सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं।

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गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि अभी तक कमर्शियल सिलिंडरों का स्टॉक कंपनियों की ओर से उन्हें नहीं मिला है और न ही बुकिंग शुरू करने के कोई निर्देश आए हैं। फिलहाल घरेलू रसोई गैस की बुकिंग और डिलीवरी ही जारी है। हालात ऐसे हैं कि रोजमर्रा की आजीविका चलाने वालों के लिए हर दिन एक नई चुनौती बनता जा रहा है।

 

गैस सिलिंडर नहीं मिलने से अब आयोजनों पर भी असर दिखने लगा है। इंदौर में कई रसोइयों और कैटरर्स ने गैस की कमी का हवाला देते हुए खाना बनाने के ऑर्डर रद्द करना शुरू कर दिए हैं। कैटरर शंकर शर्मा का कहना है कि चार सौ लोगों की रसोई में तीन से चार सिलिंडर लगते हैं, लेकिन अभी सिलिंडर मिल नहीं पा रहे हैं। इस वजह से वे ऑर्डर देने वालों से ही सिलिंडर की व्यवस्था करने को कह रहे हैं। व्यवस्था नहीं होने पर उन्हें अब तक तीन ऑर्डर रद्द करने पड़े हैं।इसके अलावा कई लोग अपने स्टॉल भी सीमित कर रहे हैं, जिससे कार्यक्रमों  की रौनक भी फीकी पड़ने लगी है।

 

इंदौर में 2 अप्रैल से शादियों के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं और इस दौरान मांग और बढ़ने की संभावना हैँ, लेकिन अभी तक सिलिंडरों की सप्लाई सामान्य नहीं हो पाई है। फिलहाल सिर्फ बुकिंग के आधार पर ही सीमित संख्या में सिलिंडर दिए जा रहे हैं, जबकि एक शादी में दस से पंद्रह सिलिंडर तक की जरूरत होती है। कई परिवारों को इस बात की चिंता सता रही है कि उनके शादी के कार्ड बांटे जा चुके हैं और अब मेहमानों की संख्या कम करना भी आसान नहीं है। अगर अप्रैल से पहले स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो कई आयोजनों में भोज तक निरस्त करने की नौबत आ सकती है।



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