सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इंदौर के एक स्कूल से निकाले गए 13 वर्षीय छात्र के पिता की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इस छात्र को शिक्षकों से जुड़े एक आपत्तिजनक मीम प्रसारित करने के आरोप में स्कूल से निष्कासित कर दिया गया था। कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।जिसने अकादमिक सत्र 2024-2025 के बीच में कक्षा 9 के इस छात्र को निकालने के स्कूल के फैसले को बरकरार रखा था।

 

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नाबालिग आमतौर पर इस तरह का व्यवहार अपने आसपास के माहौल से सीखते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सांप्रदायिक रंग वाले मीम्स को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील निपुण सक्सेना ने तर्क दिया कि छात्र पर लगाया गया दंड उसके कथित दुर्व्यवहार की तुलना में बहुत अधिक है। उन्होंने बताया कि जिस इंस्टाग्राम अकाउंट से मीम साझा किए गए थे, वह निजी था और उसे तीन बच्चे मिलकर चला रहे थे, जिन्हें स्कूल से निकाल दिया गया है।

 

याचिका में कहा गया है कि स्कूल की इस कार्रवाई ने छात्र के भविष्य को संकट में डाल दिया है क्योंकि आईसीएसई बोर्ड के नियमों के अनुसार कक्षा 10 का पंजीकरण कक्षा 9 के दौरान ही पूरा हो जाता है। ऐसे में सत्र के बीच में निष्कासन से उसकी शिक्षा की निरंतरता प्रभावित हुई है। याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि स्कूल प्रशासन का प्रतिष्ठा बचाने का तर्क गलत है क्योंकि वह अकाउंट सार्वजनिक नहीं था। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी तय की है।



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