मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की लहार स्थित बहुचर्चित कोठी से जुड़ा मामला सामने आया है। इस प्रकरण पर चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने डॉ. गोविंद सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस विवाद की सुनवाई का अधिकार सिविल न्यायालय को है और राजस्व विभाग द्वारा की गई नापतौल को सही ठहराया गया है।
दरअसल मामला लहार के वार्ड क्रमांक 12 स्थित मेन रोड पर डॉ. गोविंद सिंह के परिवार की कोठी से जुड़ा है। स्थानीय लोगों ने सरकारी रास्ता अवरुद्ध होने की शिकायत की थी। जुलाई 2024 में तहसील कार्यालय की ओर से सीमांकन कराया गया था। नपती की रिपोर्ट में सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण सामने आया। डॉ. गोविंद सिंह की ओर से राजस्व विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वहीं, इस मामले में याचिकाकर्ता डॉ. अमित प्रताप सिंह ने राजस्व विभाग के नापतौल को लेकर चैंलेज किया था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह मामला सिविल का है, जिसकी सुनवाई संबंधित सिविल न्यायालय में की जाएगी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लहार नगर पालिका को इस विवाद से अलग कर दिया है।
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अदालत ने कहा कि इस विवाद का दायरा राजस्व एवं संपत्ति संबंधी है, न कि स्थानीय निकाय से जुड़ा। याचिकाकर्ता डॉ. अमित प्रताप सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग की नापतौल और एसडीएम लहार के आदेश को सही ठहराया है। अब इस विवाद की आगे की सुनवाई सिविल न्यायालय में होगी, जहां वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट में अतिक्रमण बताया
मामला लहार नगर के वार्ड क्रमांक 12 स्थित मेन रोड पर डॉ. गोविंद सिंह परिवार की कोठी से जुड़ा है। स्थानीय लोगों ने इस कोठी में सरकारी रास्ता अवरुद्ध होने की शिकायत की थी। शिकायत पर जुलाई 2024 में तहसील कार्यालय द्वारा शासकीय आराजी क्रमांक 2711 व 2715 का सीमांकन कराया गया था। नपती की रिपोर्ट में सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण सामने आया।
