जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में जमीनी विवाद ने एक व्यक्ति की जान ले ली। विवाद के दौरान हुई तलवार और लाठी-डंडों से मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुए सुदीप चौहान की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई तथा परिवार ने पुलिस पर इलाज न कराते हुए थाने घंटों तक बिठाने का आरोप पुलिस पर लगाया है।
मामला दर्ज करने में थाना प्रभारी पप्पू यादव की लापरवाही ओर तुरंत उपचार न मिलने से मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है। विवाद के बाद घायल अवस्था में फरियादी सुदीप चौहान दुर्गापुरी चौकी पहुंचकर पूरी घटना की सूचना पुलिस को दी, लेकिन पुलिस घायल को उपचार हेतु कोई आसपास स्वास्थ्य विभाग ना ले जाते हुए मानपुर थाने पहुंची। जहां घायल को घंटे तक बिठाकर पूछताछ की गई एवं जब काफी देर बाद थाना प्रभारी पहुंचे तब जाकर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर हुई। फिर के बाद जिला अस्पताल के लिए घायल को लेकर निकले, जहां जिला अस्पताल में पहुंचकर चिकित्सकों ने प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण सुदीप ने दम तोड़ दिया।
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मृतक सुदीप चौहान का क्यारपुरा क्षेत्र में खेत है, जिसे भत्ते पर दिया हुआ था। भूमि से जुड़े हिसाब-किताब को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ गई। इसी दौरान दिलखुश मीणा, सुरेश मीणा, राजेंद्र मीणा, रामनाथ मीणा ने विवाद के दौरान अचानक हमला कर दिया। हमलावरों आरोपियों ने मृतक सुदीप पर तलवार से वार किया, जो सीधे सिर में लगा और गंभीर चोट पहुंची।
घटना के बाद सभी आरोपी मौके से फरार बताए जा रहे हैं। मानपुर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम घटना स्थल का निरीक्षण कर रही है तथा आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ भी की जा रही है। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
सहारा इंडिया के पूर्व मैनेजर सुदीप चौहान कि हत्या एक ही परिवार के चार लोगों ने कर दी, जहां सुदीप चौहान अपनी जमीन का हिसाब करने गए थे, लेकिन दूसरा पक्ष पहले से ही हथियार लेकर हमला करने की फिराक पर था, लेकिन मृतक सुदीप चौहान को कहां पता था कि सिर्फ हिसाब किताब करने पर ही उसकी जान चली जाएगी। एक बात और इसमें साफ निकलकर आई कि कहीं ना कहीं पुलिस की लापरवाही सामने आई है और मृतक को अगर पहले अस्पताल में भर्ती कराया होता तो शायद वह आज जिंदा होता। मानपुर पुलिस ने दो से तीन घंटे लगातार थाने में बैठाए रखा। एफआईआर करने से पहले जब पुलिस थाने मे पुलिस स्टाफ ने थाना प्रभारी को इसकी सूचना दी तो दो से तीन घंटे बाद थाना प्रभारी पप्पू यादव ने एफआईआर करवाई, मृतक का काफी सारा खून थाने में बैठे-बैठे ही बह गया और उसकी अस्पताल पहुंचने के बाद मौत हो गई।
