बाबा महाकाल की नगरी मे इस वर्ष महाशिवरात्रि का उल्लास दोगुना होने वाला है, क्योंकि वन विभाग द्वारा 12 से 16 फरवरी 2026 तक दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला ‘विंध्य हर्बल वन मेला’ अपने भव्य स्वरूप में नजर आने लगा है। मेले की तैयारियां इन दिनों युद्ध स्तर पर जारी हैं और मैदान में विशाल डोम और दुकानों के स्टाल सजने लगे हैं।

वन विभाग के DFO अनुराग तिवारी ने बताया कि इस पांच दिवसीय मेले का विधिवत शुभारंभ 12 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इस आयोजन को लेकर उज्जैनवासियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि उन्हें एक ही छत के नीचे जंगल के शुद्ध और दुर्लभ उत्पाद मिलने वाले हैं। मेले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आम जनता को बाजार की मिलावट से दूर सीधे वनों से प्राप्त शुद्ध देशी घरेलू उत्पाद खरीदने का सुनहरा मौका मिलेगा।

नाड़ी परीक्षण और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के सिखाए जाएंगे गुर

वन मण्डलाधिकारी उज्जैन अनुराग तिवारी ने बताया कि लगभग 200 स्टालों पर महुआ बॉडी लोशन, शुद्ध शहद, च्यवनप्राश और शिलाजीत जैसे 140 से अधिक विंध्य हर्बल ब्रांड के उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। केवल खरीदारी ही नहीं बल्कि सेहत से जुड़ी सलाह देने के लिए प्रदेशभर से नामी वरिष्ठ डॉक्टर और आयुर्वेद के बड़े ज्ञाता भी इस मेले में शिरकत करेंगे, जो आगंतुकों को नाड़ी परीक्षण और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के जरिए स्वस्थ रहने के गुर सिखाएंगे। यह मेला न केवल व्यापार का केंद्र होगा बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भी लोगों को जागरूक करेगा।

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चीता परिवार का भव्य स्कल्पचर रहेगा आकर्षण का केंद्र

वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश देता चीता परिवार का भव्य स्कल्पचर यहां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा महाकालेश्वर मंदिर से मेला परिसर तक नि:शुल्क बस सेवा भी संचालित की जाएगी। शहरवासी इस मेले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह उनके लिए सेहत, संस्कृति और शुद्धता का एक अनूठा संगम साबित होने वाला है।



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