श्योपुर जिलेभर के हजारों किसानों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट का घेराव कर उग्र आंदोलन किया। सुबह से ही किसान स्टेडियम परिसर में एकत्रित हुए और वहाँ से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। मौसम की मार झेल चुके इन किसानों का गुस्सा प्रशासन की बेरुखी पर खुलकर फूटा। किसानों ने फसलों के नुकसान का मुआवजा, केसीसी ऋण माफी और बिजली बिल माफी की मांग को लेकर घंटों तक नारेबाजी की।


किसानों का कहना था कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उनकी मेहनत पूरी तरह तबाह हो गई, लेकिन प्रशासन अब तक मुआवजा देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। हजारों की संख्या में एकत्र किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट पर धरना देते हुए प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए — “मुआवजा दो, वरना गद्दी छोड़ो”, “कलेक्टर बाहर आओ”, “किसान विरोधी सरकार मुर्दाबाद।”


करीब 2 से 3 हजार किसान घंटों तक कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे रहे, मगर कलेक्टर अर्पित वर्मा अपने चैंबर से बाहर नहीं निकले। प्रदर्शनकारियों ने कई बार अधिकारियों को बुलाने की मांग की, लेकिन प्रशासनिक अमले ने चुप्पी साधे रखी। किसानों के बढ़ते गुस्से और नारेबाजी के बीच जब हालात बिगड़ने लगे, तब जाकर घंटों बाद कलेक्टर बाहर आए और ज्ञापन लिया।

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किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही फसलों का सर्वे कर मुआवजा नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में पूरे जिले में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि अधिकारी किसानों की समस्याओं को हल्के में लेते हैं, जबकि गांवों में किसान कर्ज और बर्बाद फसलों से टूट चुके हैं। कलेक्टर के इस रवैये से किसान संगठनों में भारी आक्रोश देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अमले ने किसानों को अपमानित करने का काम किया है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रशासन की उदासीनता ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया।


किसानों ने साफ कहा कि अब अगर सरकार और प्रशासन ने हमारी नहीं सुनी, तो सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।



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