राजधानी के कोलार इलाके में मामूली सी नाराजगी ने ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी न हो सके। ‘मर्जी का खाना नहीं बना’ यह बात एक भरे-पूरे परिवार को इस कदर बिखेर देगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। गिरधर अपार्टमेंट में रहने वाले 40 वर्षीय लैब संचालक ने मंगलवार-बुधवार की दरमियानी देर रात फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पीछे छोड़ गए हैं तो बस बिलखती पत्नी और वे दो मासूम बच्चे, जिनकी आंखों के आंसू अब रुकने का नाम नहीं ले रहे।

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पापा कब उठेंगे?

बुधवार की सुबह कोलार में अन्य दिनों की तरह ही थी, लेकिन पुष्पेंद्र के घर में सन्नाटा पसरा था। जब पत्नी की नींद खुली और उन्होंने पति के बेजान शरीर को फंदे पर झूलते देखा, तो उनकी चीख ने पूरे मोहल्ले को दहला दिया। सबसे ज्यादा हृदयविदारक दृश्य तब दिखा जब पुष्पेंद्र के दोनों स्कूली बच्चे अपने पिता के पास जाने की जिद करने लगे। उन्हें क्या मालूम था कि जिस पिता के साथ वे कल शाम तक खेल रहे थे, उनका साया अब हमेशा के लिए उनके सिर से उठ चुका है। मासूमों का अपने पिता से बात करने की कोशिश करना वहां मौजूद हर शख्स की आंखों को नम कर गया।

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एक पल का गुस्सा और उम्र भर का मातम

पुलिस जांच में सामने आया कि मंगलवार रात खाने की बात को लेकर पुष्पेंद्र का पत्नी से सामान्य विवाद हुआ था। इसी छोटी सी बात पर नाराज होकर वह घर से बाहर निकल गए थे। देर रात वह कब लौटे और कब उन्होंने दूसरे कमरे में जाकर मौत को गले लगा लिया, घर के किसी सदस्य को इसकी भनक तक नहीं लगी। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे यह साफ होता है कि यह आत्मघाती कदम आवेश में आकर उठाया गया था। कोलार थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया और दोपहर बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। पुलिस अब हर एंगल से मामले की तफ्तीश कर रही है कि क्या विवाद की गहराई कुछ और थी या महज एक पल की सनक ने दो बच्चों को अनाथ कर दिया।



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