ग्वालियर की साइबर क्राइम पुलिस को 2.52 करोड़ की डिजिटल ठगी मामले में बड़ी सफलता मिली है। एयरफोर्स के रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। अब तक इस मामले में कुल सात आरोपी पकड़े जा चुके हैं। पुलिस तीनों आरोपियों को ग्वालियर ले आई है। कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड लिया जाएगा।
क्राइम ब्रांच जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम पहले पांच खातों में भेजी गई, फिर देश के 15 राज्यों के 300 से ज्यादा खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इनमें दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, असम और कर्नाटक सहित कई राज्य शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि 28 लाख रुपए इंडसइंड बैंक के एक खाते में ट्रांसफर हुए थे। तकनीकी जांच के बाद दिल्ली पहुंची टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनके कब्जे से छह पासबुक व चेक बुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
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फर्जी खाते खुलवाते थे
पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे। खाते गिरोह को बेचते थे। पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था। एयरफोर्स से रिटायर्ड 90 वर्षीय डॉ. नारायण महादेव से ठगी गई रकम सबसे पहले दिल्ली, नोएडा, गुंटूर आंध्र प्रदेश और वाराणसी के पांच बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। आंध्र प्रदेश के दो खातों में 1.5 करोड़ रुपए, जबकि दिल्ली-यूपी के तीन खातों में करीब 1 करोड़ रुपए पहुंचे थे।
पहली लेयर के बाद यह रकम देश के 15 राज्यों के 300 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इनमें दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, असम और कर्नाटक सहित अन्य राज्य शामिल हैं। ग्वालियर क्राइम ब्रांच द्वारा की गई खातों की पड़ताल के दौरान दिल्ली स्थित एक फर्म “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” के करंट अकाउंट में बड़ी राशि जमा होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम दिल्ली पहुंची। लोकेशन ट्रेस करने पर मोहित मिश्रा और शाहिल खान अपनी-अपनी दुकानों पर मिले, जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। दोनों ने बताया कि फर्म राहुल प्रजापति और हरीश यादव के कहने पर खोली गई थी। बैंक वेरिफिकेशन के करीब एक महीने बाद इसे बंद कर दिया गया था। खाते में आए पैसे के बदले उन्हें 2.5 लाख रुपए कमीशन मिला था।
