धार में यह पहला मौका है, जब धार भोजशाला के विवाद को निपटाने के लिए सरकार ने मंत्री या संगठन के वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी नहीं दी। इस बार अधिकारी ही दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर बीच का हल निकालने की कोशिश करते रहे। तीन बार बसंत पंचमी पर धार में विवाद की स्थिति बनी, तब प्रदेश सरकार के मंत्री की भूमिका हमेशा रही थी, लेकिन हर बार विवाद निपटने के बाद हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमिका निभाने वाले रणनीतिकारों के प्रति नाराजगी जताई है।

वर्ष 2006 में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को धार की भोजशाला की जिम्मेदारी दी गई थी। तब भोजशाला खाली कराने को लेकर विवाद हुआ और आंसू गैस के गोले चले। वर्ष 2012 में भी हालात बिगड़े थे और लाठीचार्ज भी हुआ था। तब जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री महेंद्र हार्डिया जब भोजशाला समिति के घायल पदाधिकारियों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे तो एक पदाधिकारी ने मंत्री के गले में हरा दुपट्टा डाल दिया था और नाराजगी जताई थी।

वर्ष 2016 में धार में स्थिति ज्यादा खराब नहीं हुई। सांकेतिक नमाज का रास्ता निकाला गया और भोजशाला समिति का जुलूस आते ही अफसरों ने प्रवेश शुरू करा दिया था। तब इसकी रणनीति तत्कालीन मंत्री नरोत्तम मिश्रा और संगठन महामंत्री रहे अरविंद मेनन ने बनाई थी। वे पूरे दिन धार के सर्किट हाउस में बैठे रहे।

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नरोत्तम मिश्रा ने संभाली थी कमान

वर्ष 2016 में धार में स्थिति ज्यादा खराब नहीं हुई। सांकेतिक नमाज का रास्ता निकाला गया और भोजशाला समिति का जुलूस आते ही अफसरों ने प्रवेश शुरू करा दिया था। तब इसकी रणनीति तत्कालीन मंत्री नरोत्तम मिश्रा और संगठन महामंत्री रहे अरविंद मेनन ने बनाई थी। वे पूरे दिन धार के सर्किट हाउस में बैठे रहे।

इस बार अफसरों पर भरोसा

इस बार सरकार ने धार की जिम्मेदारी किसी मंत्री को नहीं दी है। वैसे धार के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं, लेकिन पारिवारिक सदस्य के निधन के कारण वे दस दिन के अवकाश पर हैं। भाजपा संगठन की तरफ से भी कोई पदाधिकारी धार नहीं आया है।



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