राज्य के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालय RGPV में कथित आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितताओं का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सोमवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के श्यामला हिल्स स्थित बंगले का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। बाद में संगठन ने मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मामले की CBI से जांच कराने की मांग की।
ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की
ABVP का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2019-20 से 2023-24 तक की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की, जिससे करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है। प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
संगठन ने RGPV में कई गड़बड़ियों का आरोप लगाया
– छात्रों के हित में उपयोग होने वाले फंड का बड़े स्तर पर दुरुपयोग।
– बिना अधिकृत अनुमति के भारी वित्तीय लेन-देन।
– कई फिक्स्ड डिपॉजिट का रिकॉर्ड न होना तथा समय से पहले तोड़े जाने की जानकारी।
-बैंक द्वारा पेनल्टी काटे जाने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा आपत्ति न उठाना।
– करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक के कॉरपस फंड का संदिग्ध स्थिति में होना।
-वित्तीय नियंत्रण, आंतरिक ऑडिट और संचालन गाइडलाइन का पूरी तरह अभाव।
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वर्षों से संगठित अनियमितताएं छिपाई जा रही हैं
ABVP के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि लगातार सामने आ रहे तथ्य इस ओर इशारा करते हैं कि विश्वविद्यालय में वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से वित्तीय गड़बड़ियां हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि पूरी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक हो जाए तो कई बड़े अधिकारी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है। चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में देरी, रिजल्ट जारी करने में अनियमितता और छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई न होना आम बात हो गई है। उनके अनुसार RGPV अपने मूल शैक्षणिक उद्देश्य से भटक चुका है।
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धारा 54 लागू करने की मांग
ABVP ने मांग की है कि RGPV में धारा 54 लागू कर विश्वविद्यालय को तत्काल राज्य सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लिया जाए। साथ ही विश्वविद्यालय को तीन भागों में विभाजित करने की वर्षों पुरानी मांग को भी दोहराया गया, ताकि बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन संभव हो सके।
