राजधानी स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में टेंडर प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपकर हाल ही में जारी दो टेंडरों में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा क्वेश्चन पेपर पब्लिशिंग और व्हीकल लोडिंग फॉर एग्जाम पर्पज के लिए निकाले गए टेंडर संदिग्ध परिस्थितियों में एक कंपनी को सौंपे गए हैं। मांग की गई है कि इन टेंडरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि गड़बड़ी साबित हो तो टेंडर निरस्त कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। NSUI के प्रदेश महासचिव अंकित भारद्वाज ने टेंडरों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
पुराने टेंडर का भी हवाला
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में डाटा स्कैनिंग का टेंडर भी नियमों को दरकिनार कर एक अप्रशिक्षित कंपनी को दिया गया था। बाद में जांच में अनियमितताएं सामने आने पर वह टेंडर निरस्त किया गया। उस समय टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों में राघवेन्द्र सिंह (एग्जाम कंट्रोलर), योगेन्द्र राठौर, असीम तिवारी और सोनवाने के नाम सामने आए थे। NSUI ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें गंभीर त्रुटियों की आशंका है।
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जांच समिति गठित करने की मांग
संगठन ने कुलपति से आग्रह किया है कि दोनों नए टेंडरों की जांच के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति गठित की जाए। NSUI नेताओं का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जांच में भारी अनियमितताएं सामने आएंगी।ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द जांच समिति का गठन नहीं हुआ तो NSUI विश्वविद्यालय के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस मामले ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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