भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पीछे वर्षों से रह रहे आदिवासी परिवारों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई फिलहाल टल गई है। कांग्रेस के तीखे विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच जिला प्रशासन को सोमवार की प्रस्तावित बेदखली कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी। यह कार्रवाई करीब 27 झुग्गी परिवारों को बिना पूर्ण पुनर्वास के हटाने को लेकर की जा रही थी। सोमवार सुबह झुग्गियों को हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन रविवार को कांग्रेस के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई फिलहाल स्थगित की गई है। शहर वृत एसडीएम दीपक पांडे के मुताबिक, जल्द ही अगली तारीख तय की जाएगी।
नेत प्रतिपक्ष ने सीएम को लिखा पत्र, कहा कि यह इंसानियत का सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मानस भवन के पास बसे जनजातीय और सामान्य परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दशकों से बसे परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ना अन्यायपूर्ण है। यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि न्याय और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हुई है।
पटवारी बस्ती पहुंचे, अफसरों को दी खुली चेतावनी
रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद बस्ती में पहुंचे और वहां रह रहे लोगों से मुलाकात की। आदिवासी महिलाओं ने पटवारी को बताया कि वे करीब 60-70 वर्षों से यहीं रह रही हैं और कर्ज लेकर अपने छोटे-छोटे घर बनाए हैं। इसके बाद पटवारी ने मौके से ही एसडीएम और अपर कलेक्टर से फोन पर बातचीत करते हुए साफ कहा कि यदि एक भी ईंट हटाई गई तो कांग्रेस सड़क पर खड़ी मिलेगी।
27 परिवार, 200 से ज्यादा लोग, 70 साल पुराना बसेरा
मानस भवन के पीछे स्थित यह बस्ती लगभग 70 साल पुरानी है, जहां 27 से अधिक परिवार और 200 से ज्यादा लोग रहते हैं। प्रशासन का कहना है कि यह भूमि खसरा नंबर 1413/1 की वन भूमि है, जिस पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित थी। यह साल की आखिरी बड़ी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मानी जा रही थी।
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शिफ्टिंग को लेकर असमंजस और विरोध
प्रशासन इन परिवारों को भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में बने आवासों में शिफ्ट करने की योजना बना रहा है। बताया जा रहा है कि यह आवास निशुल्क दिए जाएंगे और प्रति परिवार करीब दो लाख रुपए की लागत मानस भवन प्रबंधन द्वारा वहन की जाएगी। हालांकि रहवासी शिफ्टिंग को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और अपने पुराने ठिकाने को छोड़ने का विरोध कर रहे हैं।
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कांग्रेस का आरोप,कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पीसी शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कार्रवाई को गोपनीय रखा गया और प्रभावित परिवारों से पर्याप्त संवाद नहीं किया गया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन पुनर्वास को लेकर क्या ठोस और न्यायसंगत फैसला लेता है या फिर राजनीतिक टकराव और तेज होता है।
