भोपाल नगर निगम (BMC) का नया मुख्यालय आखिरकार तैयार होकर उपयोग में आने लगा है। तुलसी नगर में बनी इस बहुचर्चित बिल्डिंग में शिफ्टिंग का काम तेजी से चल रहा है। फर्नीचर और फाइलें नए भवन में पहुंच चुकी हैं, सिर्फ इंटरनेट लीज लाइन का काम बाकी है। इसके पूरा होते ही नगर निगम के सभी कार्यालय नए मुख्यालय से संचालित होने लगेंगे। यह वही भवन है, जिसकी लागत 23 करोड़ से बढ़कर करीब 40 करोड़ रुपए तक पहुंच गई और जो निर्धारित समय से करीब दो साल देरी से बनकर तैयार हुआ। अब जब शिफ्टिंग शुरू हो चुकी है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है इतनी देरी और खर्च के बाद बिल्डिंग कितनी मजबूत और कितनी सुविधाजनक है?

फरवरी के पहले हफ्ते में पूरा शिफ्ट होगा निगम

निगम प्रशासन के मुताबिक, फरवरी के पहले सप्ताह तक सभी विभागों के यहां शिफ्ट होने की संभावना है। शिफ्टिंग पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री के हाथों भवन के लोकार्पण की भी तैयारी की जा रही है। महापौर मालती राय का कार्यालय पहली मंजिल पर होगा, जबकि नगर निगम कमिश्नर को शीर्ष तल यानी आठवीं मंजिल पर बैठाया गया है।

हाई-टेक और सुव्यवस्थित

नए मुख्यालय की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई-टेक बैठक व्यवस्था और विभागवार प्लानिंग बताई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इससे फाइलों की आवाजाही कम होगी और कामकाज ज्यादा तेज व पारदर्शी हो सकेगा। हर फ्लोर पर स्मार्ट मीटिंग रूम और विजिटर लाउंज बनाए गए हैं।

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जानिए किस मंजिल पर क्या होगा काम

 ग्राउंड फ्लोर: लोक सेवा केंद्र नागरिकों को छोटे कामों के लिए ऊपर नहीं जाना पड़ेगा।

पहली मंजिल: महापौर मालती राय, परिषद अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी और नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के चेंबर।

दूसरी मंजिल: सामाजिक न्याय, समग्र आईडी, विवाह पंजीयन और जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र शाखाएं।

तीसरी मंजिल: फाइनेंस और आईटी विभाग।

चौथी मंजिल: पूरी तरह जल कार्य विभाग के लिए आरक्षित।

पांचवीं से सातवीं मंजिल: बिल्डिंग परमिशन, इंजीनियरिंग, गार्डन, हेल्थ और स्वच्छता विभाग।

आठवीं मंजिल (शीर्ष तल): नगर निगम कमिश्नर, स्थापना विभाग और पीआरओ कार्यालय।

पहले कमिश्नर की बैठक व्यवस्था महापौर के साथ पहली मंजिल पर थी, जिसे अब बदल दिया गया है। एमआईसी सदस्यों के चेंबर भी उनके-अपने विभागों वाले फ्लोर पर ही बनाए जाने की व्यवस्था रखी गई है।

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250 लोगों का मिनी हॉल

भवन में 250 लोगों की क्षमता वाला एक मिनी हॉल भी तैयार किया गया है। हालांकि यह पूरी परिषद की बैठक के लिए छोटा है, लेकिन सामान्य बैठकों और कार्यक्रमों के लिए इसे उपयोगी विकल्प बताया जा रहा है। नया मुख्यालय भले ही सुविधाओं से लैस बताया जा रहा हो, लेकिन इसकी बढ़ी लागत और दो साल की देरी को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यह भवन वास्तव में नगर निगम के कामकाज को कितना सुगम बनाता है और जनता को इससे क्या सीधा लाभ मिलता है।

 



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