वर्षों से लंबित मांगों को लेकर शिक्षक संघ ने राजधानी भोपाल में कड़ा और आक्रामक प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से बड़ी संथ्या जुटे शिक्षकों ने 21 सूत्री मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संघ ने साफ कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस फैसले चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले शिक्षकों की अनदेखी
शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले शिक्षकों की अनदेखी लगातार की जा रही है। वेतन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे वर्षों से अटके हैं, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए शिक्षकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
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ये हैं शिक्षक संघ की प्रमुख 21 मांगें
– वेतन विसंगतियों का तत्काल निराकरण
– लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने
– पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
– समयमान वेतनमान का लाभ
– क्रमोन्नति से जुड़े मामलों का निपटारा
– नई शिक्षक भर्ती कर पदों की कमी दूर करने
– अतिथि और संविदा शिक्षकों का नियमितीकरण
– कार्यभार और गैर-शैक्षणिक कार्यों में कमी
– स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता
– सेवानिवृत्ति लाभों का समय पर भुगतान
– चिकित्सा और अवकाश सुविधाओं में सुधार
– शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई में निष्पक्षता
– नई शिक्षा नीति के नाम पर बढ़े दबाव पर रोक
– विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना
– शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना
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चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का ज्ञापन शासन-प्रशासन को सौंपा। संघ नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने जल्द संवाद कर निर्णय नहीं लिया, तो चरणबद्ध आंदोलन, कार्य बहिष्कार और प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा। शिक्षकों के इस कड़े प्रदर्शन के मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। शिक्षक संघ का कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के हक और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए है, पीछे हटने का सवाल ही
