मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के बीच हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नर्सिंग काउंसिल ने पीजी कोर्स (पोस्ट बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग) की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह काउंसलिंग 19 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक चलेगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की याचिका पर दिया, जिससे प्रदेश के हजारों नर्सिंग विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है।
काउंसलिंग का शेड्यूल
– 19 से 22 दिसंबर: रजिस्ट्रेशन
– 23 दिसंबर: रिक्त सीटों की जानकारी और मेरिट सूची जारी
– 24 से 25 दिसंबर: चॉइस फिलिंग
– 27 दिसंबर: प्रोविजनल अलॉटमेंट
– 28 से 30 दिसंबर: दस्तावेज सत्यापन और कॉलेज रिपोर्टिंग
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पिछले तीन वर्षों से बड़ी संख्या में नर्सिंग की सीटें खाली
परमार ने कहा कि नर्सिंग घोटाले के बाद से प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। पिछले तीन वर्षों से बड़ी संख्या में नर्सिंग की सीटें खाली पड़ी हैं। सत्र 2023-24 में चिकित्सा शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जीरो ईयर घोषित करना पड़ा, जबकि सत्र 2024-25 में सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाया। सत्र 2025-26 में भी हालात ऐसे ही बन रहे थे, लेकिन काउंसलिंग में हो रही देरी को लेकर NSUI ने हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण हजारों नर्सिंग विद्यार्थी दूसरे राज्यों में पढ़ाई के लिए मजबूर हुए हैं। जो छात्र मध्यप्रदेश में रहकर पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ रहा है। NSUI ने हमेशा छात्रों के हित में आवाज उठाई है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
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इतनी सीटें अब भी खाली
नर्सिंग में प्रवेश के आंकड़ों को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पीबी बीएससी नर्सिंग में शासकीय कॉलेजों की 400 सीटों में से केवल 334 पर ही प्रवेश हो सका, जबकि 66 सीटें खाली रह गईं। निजी कॉलेजों में 3376 सीटों के मुकाबले सिर्फ 350 छात्रों ने प्रवेश लिया और 3018 सीटें रिक्त हैं। इसी तरह एमएससी नर्सिंग में शासकीय कॉलेजों की 405 सीटों में से 335 भरी गईं, जबकि 70 सीटें खाली रहीं। निजी कॉलेजों की 1551 सीटों में से केवल 431 सीटों पर ही प्रवेश हुआ और 1120 सीटें खाली हैं। कुल मिलाकर दोनों पाठ्यक्रमों में लगभग 75 प्रतिशत सीटें खाली हैं।
