राजधानी भोपाल के बहुचर्चित 26.5 टन गौमांस कांड में रोज नई परतें खुल रही हैं। 17 दिसंबर 2025 की रात पकड़े गए कंटेनर ट्रक के बाद अब स्लॉटर हाउस को लेकर बेहद गंभीर खुलासा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस पूरी तरह CCTV कैमरों से लैस था और इन कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा के पास थी। यानी, अंदर क्या हो रहा है इसकी पल-पल की खबर उसी के पास रहती थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मांस पकड़े जाने के अगले ही दिन नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने CCTV फुटेज देखी, लेकिन इसके बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही फुटेज सार्वजनिक की गई। अफसर मथुरा भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार करते रहे, जबकि कैमरों में कैद सच उसी वक्त सामने आ सकता था।
जब कैमरे लगे थे, तो जांच किस बात की?
अगर स्लॉटर हाउस के भीतर गाय या उसके वंश को लाया गया था, तो वह निश्चित तौर पर CCTV में रिकॉर्ड हुआ होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि फुटेज होते हुए भी जांच टाली क्यों गई? क्या जानबूझकर वक्त दिया गया ताकि सबूत कमजोर पड़ जाएं?
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फुटेज आज भी गायब, सवाल बरकरार
अब तक CCTV रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे संदेह और गहरा गया है क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश हो रही है? क्या सिस्टम के भीतर बैठे लोग मामले को दबाने में जुटे हैं? मामले को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने जिंसी स्लॉटर हाउस का निरीक्षण कर कई आपत्तियां दर्ज कीं। उनका कहना है कि बाहर से स्लॉटर हाउस बंद दिखाया जा रहा है, जबकि अंदर का एक गेट खुला है और कामकाज के संकेत मिले हैं। एक और बड़ा सवाल जब स्लॉटर हाउस पूरी तरह सील है, तो प्राइवेट सिक्योरिटी किसके आदेश पर तैनात है? जबकि भोपाल पुलिस पहले से मौजूद है। हैरानी की बात यह कि बाहर तैनात पुलिसकर्मियों को भी नहीं पता कि यह निजी सुरक्षा किसके लिए है।
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MIC और महापौर की जवाबदेही तय
जहां शुरुआत में इसे भैंस का मांस बताया गया, वहीं मथुरा की सरकारी लैब रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि मांस गाय या उसके वंश का है। स्लॉटर हाउस भोपाल नगर निगम के अधीन है और इसका प्रशासनिक नियंत्रण Mayor-in-Council (MIC) के पास। ठेका, लीज और संचालन की शर्तें MIC तय करती है। ऐसे में अगर यहीं से प्रतिबंधित मांस निकल रहा था, तो जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता।
