मध्य प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं होने को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन अब तक लागू नहीं किया गया है, जबकि इस संबंध में शासन का आदेश पहले ही जारी हो चुका है। रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन जुनियर जॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के नेतृत्व में डॉक्टरों ने इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण विरोध शुरू कर दिया है। डॉक्टर फिलहाल काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर रहे हैं और शासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
शासन आदेश के बावजूद नहीं मिला संशोधित स्टाइपेंड
डॉक्टरों का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन के आदेश 7 जून 2021 के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन लागू होना था। इसके बावजूद अब तक संशोधित स्टाइपेंड लागू नहीं किया गया है। साथ ही अप्रैल 2025 से देय एरियर भी लंबित है।रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शासन और प्रशासन से निवेदन किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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रविवार को जस्टिस मार्च
मामले को लेकर डॉक्टरों ने आंदोलन का अगला चरण भी तय कर लिया है। JDA के अनुसार रविवार को प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेज परिसरों में “जस्टिस मार्च” निकाला जाएगा। इसके बाद प्रेस वार्ता कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी जाएंगी।
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सोमवार से इलेक्टिव सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी
रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई समाधान नहीं निकलता है, तो सोमवार से प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। JDA का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन के पूर्व निर्धारित आदेश को लागू कराने और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है।
