राजधानी भोपाल के करोंद स्थित अमन कॉलोनी ईरानी डेरे से देश के 14 राज्यों में सक्रिय ईरानी गैंग के सरगना से भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। इस गैंग के मुख्य आरोपी आबिद अली उर्फ राजू ईरानी को सूरत पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद भोपाल पुलिस ने उसे ट्रांजिट वारंट पर भोपाल लाकर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 17 जनवरी तक रिमांड पर लिया गया है। पुलिस को उसकी लगभग सात साल से तलाश थी। वर्ष 2017 में उसके खिलाफ आगजनी का प्रकरण दर्ज हुआ था, तब से वह छुपकर भोपाल में ही रहता रहा और पुलिस को चकमा देता रहा।

पुलिस पर लंबे समय तक उसे संरक्षण देने के आरोप भी लगते रहे हैं। अब गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। राजू ईरानी पूछताछ के दौरान सामान्य व्यवहार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसे लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि उसके खिलाफ कोई गंभीर अपराध दर्ज नहीं है।

गैंग का मुख्यालय भोपाल 

राजू ईरानी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह भोपाल को अपने गैंग का मुख्यालय बनाकर काम करता है। उसका गिरोह देश के 12 से 14 राज्यों में फैला है और करीब 50 बदमाश अलग-अलग राज्यों में धोखाधड़ी, चोरी और लूट जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं। हालांकि वह यह भी कहता है कि वह भोपाल में किसी बड़ी वारदात को होने नहीं देता ताकि स्थानीय पुलिस उसके पीछे न पड़े और उसके डेरे को संरक्षण मिलता रहे।

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उसने बताया कि भोपाल में केवल नए लड़कों को ट्रेनी के रूप में लूट जैसी छोटी वारदातें कराई जाती हैं, जबकि बड़ी वारदातें अन्य राज्यों में होती हैं। अन्य राज्यों में होने वाली लूट और डकैती का सामान भोपाल में लाकर जमा किया जाता है और यहीं आसपास के जिलों के व्यापारियों व ज्वैलर्स के जरिए माल खपाया जाता है।

छोटे बदमाशों से सुरक्षा शुल्क

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि ईरानी गिरोह का सरगना छोटे बदमाशों को अपने गैंग में शामिल करता है और बदले में लूट-डकैती की 50 प्रतिशत रकम लेता है। यदि कोई बदमाश पकड़ा जाता है तो उसके कोर्ट और पुलिस मामलों को निपटाने का खर्च गैंग का सरदार उठाता है। यही सरगना गैंग के सदस्यों पर नियंत्रण बनाए रखने का तरीका भी है।

गैंग के भीतर कब्जे की जंग

गैंग में वर्चस्व को लेकर अमन कॉलोनी में दो गुटों के बीच संघर्ष भी चल रहा है। राजू ईरानी का विवाद काला ईरानी और मस्तान ईरानी से काफी समय से चल रहा है। काला ईरानी और मस्तान ईरानी नया गैंग बनाकर कब्जा करना चाहते थे, लेकिन राजू ईरानी उनकी मुखबिरी कराकर कई बदमाशों को पहले ही पुलिस के पकड़वा देता था।

राजू के पकड़े जाने के बाद काला ईरानी और मस्तान ईरानी का गुट सक्रिय हो गया है और लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे उसके गैंग में शामिल हो जाएं। काला ईरानी के गुर्गे डेरे के कई लोगों से संपर्क कर गैंग की बागडोर अपने हाथ में लेने की रणनीति बना रहे हैं।

स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण गैंग कब्जे की यह लड़ाई खूनी संघर्ष में न बदल जाए, इसके लिए पुलिस ने डेरे पर दिन-रात जवानों को तैनात कर दिया है।



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