मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को अपना पहला पेपरलेस बजट पेश करने जा रही है। बजट से पहले राजधानी भोपाल में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों से बातचीत में सामने आया कि लोगों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई, बेरोजगारी और पेंशन को लेकर है। हर वर्ग की नजर इस बजट पर टिकी है।

महंगाई से त्रस्त गृहिणियां

गृहिणी रमा कहती हैं कि रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। राशन से लेकर सोने-चांदी तक हर चीज महंगी हो गई है। बच्चों की शादी-ब्याह और पालन-पोषण गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। उनका कहना है कि सरकार को महंगाई कम करने के ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि आम परिवारों को राहत मिल सके।

पेंशन के लिए भटकते बुजुर्ग

तुलसी टावर क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग रामचंद्र बताते हैं कि कई बार आवेदन करने के बावजूद उन्हें पेंशन नहीं मिल पाई। फॉर्म बार-बार रिजेक्ट हो जाता है और वे मजदूरी कर घर चला रहे हैं। उनका कहना है कि हर बजट से उम्मीद रहती है, लेकिन हकीकत में लाभ नहीं मिलता। इसी तरह 70 वर्षीय आनंद गौतम ने भी पेंशन न मिलने पर नाराजगी जताई। वे कई बार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली। उनका कहना है कि चुनाव के समय घोषणाएं होती हैं, पर जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिलती। वे चाहते हैं कि इस बार सरकार बुजुर्गों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे।

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पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी की दरकार

गोविंदपुर निवासी दीपावली ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। महंगाई के कारण घरेलू जरूरतें पूरी करना मुश्किल है। घर में शादी है, लेकिन खरीदारी करने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। उनका कहना है कि शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। वहीं युवा प्रशांत सूर्यवंशी ने मांग की कि बजट में युवाओं के लिए अलग से प्रावधान हो। नियमित रूप से सरकारी भर्तियों का शेड्यूल जारी किया जाए और रिक्त पदों की समय-समय पर जानकारी दी जाए, ताकि बेरोजगारी कम हो सके।

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आमजन की नजरें 18 फरवरी पर

महंगाई, बेरोजगारी, पेंशन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं साफ हैं। अब देखना होगा कि सरकार अपने पहले पेपरलेस बजट में आमजन की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है।



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