मध्यप्रदेश में मठ-मंदिरों की माफी भूमि की नीलामी के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। भोपाल में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि मंदिरों की भूमि कोई सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि देवी-देवताओं के नाम दर्ज धार्मिक संपत्ति है और इसे नीलाम करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सनातन परंपराओं पर भी सीधा प्रहार है।दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार के 22 अप्रैल 2023 के आदेश के तहत मंदिरों की 10 एकड़ से अधिक माफी भूमि को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके आधार पर प्रदेशभर के पुजारियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना बताया।  दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंदिरों की 10 एकड़ से अधिक माफी भूमि के घोष विक्रय (नीलामी) को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। 

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय अपने 6 सितंबर 2021 के फैसले में साफ कह चुका है कि देवता के नाम दर्ज भूमि की नीलामी नहीं हो सकती और ऐसी भूमि को राज्य सरकार या कलेक्टर के नाम दर्ज नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद नीलामी की प्रक्रिया शुरू करना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए थे।

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पुजारियों की आजीविका पर संकट

दिग्विजय सिंह ने कहा कि माफी भूमि से ही पुजारी भगवान की सेवा-पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इस भूमि की नीलामी से हजारों पुजारी परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।सनातन संस्कृति बनाम सत्ता की राजनीतिपूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जो सरकार खुद को सनातन संस्कृति का संरक्षक बताती है, वही सरकार आज मंदिरों और पुजारियों के हितों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि धर्म का संरक्षण समाज और परंपरा ने किया है, न कि सत्ता ने।

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आंदोलन की चेतावनी

दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने मठ-मंदिरों की माफी भूमि की नीलामी का फैसला तुरंत वापस नहीं लिया, तो वे पुजारी समाज के आंदोलन में खुलकर शामिल होंगे। उन्होंने सरकार से संवेदनशील और न्यायसंगत निर्णय लेने की अपील की। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में विरोध और तेज होने के संकेत हैं।



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