चौथा समयमान वेतनमान और अन्य लंबित मांगों को लेकर मंत्रालय एवं विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का आक्रोश शुक्रवार को खुलकर सामने आ गया। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने मंत्रालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए विधानसभा सत्र से पहले निर्णय लेने की मांग की।प्रदर्शन में मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ, मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, स्थाई कर्मी मोर्चा, वन श्रमिक मंच सहित कई कर्मचारी संगठनों की भागीदारी रही। वल्लभ भवन के बाहर हुई सभा को अशोक पांडे, सुधीर नायक, कामरेड रामराज तिवारी, श्याम सुंदर शर्मा, विजय मिश्रा, सत्येंद्र पांडे सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।
दूसरों को देने वाला हक, खुद मंत्रालय कर्मचारियों को नहीं
मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि चौथा समयमान वेतनमान प्रदेश के अन्य कर्मचारियों को देने वाला मंत्रालय ही आज अपने कर्मचारियों के साथ अन्याय का शिकार है। उन्होंने कहा कि वर्षों से मंत्रालयीन कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान नहीं मिला, जिससे भारी असंतोष है।
हाईकोर्ट आदेश लागू करने की मांग
मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया कि सरकार के समक्ष 12 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। कर्मचारियों ने 70% से 80% वेतन देने के आदेश को निरस्त करने संबंधी हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने और मंत्रालयीन लिपिकों को तृतीय समयमान में तृतीय पदोन्नति का वेतनमान देने की मांग भी उठाई।
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ये हैं प्रमुख मांगें
– स्थायी कर्मियों, दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारियों का नियमितीकरण
– केंद्र के समान महंगाई भत्ता और 3% डीए तत्काल देने
– चौथा समयमान वेतनमान और उच्च पदनाम का लाभ
– मंत्रालय स्थापना व मंत्री स्थापना में कार्यरत आकस्मिक निधि कर्मचारियों का नियमितीकरण
– पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
– सीपीसीटी और तीन संतान संबंधी प्रतिबंध समाप्त करना
– स्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों को डाइंग कैडर घोषित करने के फैसले का विरोध
– लिपिकों की वेतन विसंगति दूर करना
– वाहन चालकों की मांगों का निराकरण
– 22 दिसंबर 2025 का कर्मचारी विरोधी आदेश वापस लेना
– हाईकोर्ट के 6 जनवरी 2026 के आदेश का पूर्ण पालन
– चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदनाम में परिवर्तन और पे-प्रोटेक्शन देना शामिल हैं।
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आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि विधानसभा सत्र से पहले मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि, सरकार की ओर से शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिए जाने की बात भी संगठन ने कही है।
