राजधानी भोपाल इस बार होली पर आस्था, परंपरा और उत्साह देखने को मिलेगा। शहर में करीब 1500 स्थानों पर होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसके साथ ही पांच दिवसीय रंगोत्सव की शुरुआत होने जा रही है, जिससे पूरा शहर उत्सवी रंग में रंग जाएगा। होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण शहर और प्रदेश के कई हिस्सों में 2 और 3 मार्च की देर रात तक होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद 4 मार्च को धुलेंडी पर लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे।
तैयारियों को लेकर पुलिस के साथ बैठक
भोपाल में होलिका दहन, होली और रंगपंचमी के चल समारोह को लेकर पुलिस आयुक्त कार्यालय में प्रशासन और श्री हिंदू उत्सव समिति के बीच बैठक हुई। बैठक में जुलूस मार्ग, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई।समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने पूर्व शांति समिति बैठक में आमंत्रित न किए जाने पर आपत्ति जताई, जिस पर पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने इसे प्रशासनिक चूक मानते हुए खेद व्यक्त किया। बैठक के बाद समिति पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। निर्णय लिया गया कि ग्रहण के कारण होली का जुलूस 4 मार्च को निकाला जाएगा।
पर्यावरण की चिंता, गोकाष्ठ का विकल्प
इस बार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गोकाष्ठ समितियों ने शहर में जगह-जगह स्टॉल लगाए हैं। यहां लकड़ी के बजाय गोबर से बने गोकाष्ठ रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि हरित और प्रदूषण-मुक्त होली का संदेश दिया जा सके।
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विधि-विधान से करें होलिका पूजन
पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार, शुद्ध स्थान को गोबर से लीपकर लकड़ी व गोकाष्ठ सजाएं, गोबर के कंडे रखें और लाल पताका स्थापित करें। गंध, धूप-दीप से भक्त प्रह्लाद का पूजन करने के बाद शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें। दहन के बाद अग्नि की सात परिक्रमा लगाना शुभ माना जाता है। गेहूं की बालियां सेंककर ग्रहण करने की परंपरा अन्न समृद्धि और परिवार के स्वास्थ्य के लिए मंगलकारी मानी जाती है।
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4 मार्च को निकलेगा भव्य चल समारोह
श्री हिंदू उत्सव समिति द्वारा आयोजित परंपरागत चल समारोह इस वर्ष 4 मार्च को निकाला जाएगा। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि जुलूस के संयोजक लोकेश शर्मा को बनाया गया है और तैयारियां जोरों पर हैं।वजुलूस में ढोल-ताशों की गूंज, सुसज्जित झांकियां, दुल-दुल घोड़ी की आकर्षक प्रस्तुति, डीजे की धुनें और रंग-गुलाल की बौछारें शहर को उत्साह से भर देंगी। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनेगा।
