प्रदेश के नव नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि में पूरे वेतन से वंचित रखने की व्यवस्था एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है। इस मुद्दे के साथ 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने गरुवार को भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में एक साथ विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी में कर्मचारी सतपुड़ा भवन के सामने एकत्र हुए, नारेबाजी की और बाद में मंत्रालय पहुंचकर मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से आग्रह कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, और पुरानी पेंशन योजना शामिल हैं।

कर्मचारियों की मूलभूत मांगें सरकार के पास लंबित

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों की मूलभूत मांगें सरकार के पास लंबित हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी और उग्र रूप ले सकता है।

वेतन कटौती नहीं, समान अधिकार की मांग

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि एक ही पद पर काम करने के बावजूद नए कर्मचारियों को तीन साल तक कम वेतन देना न सिर्फ आर्थिक शोषण है, बल्कि समान कार्य-समान वेतन के सिद्धांत के भी खिलाफ है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के दिन से ही कर्मचारी से पूरी जिम्मेदारी ली जाती है, लेकिन उसका पूरा वेतन रोक लिया जाता है।

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11 सूत्रीय मांगों के साथ सरकार को घेरा

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के सामने 11 सूत्रीय मांगों की सूची रखी। इनमें महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का लाभ, सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करना, परिवीक्षा अवधि में कम वेतन की व्यवस्था खत्म करना, पुरानी पेंशन योजना लागू करना, पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना, आउटसोर्स और स्थायी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, ई-अटेंडेंस से मुक्ति जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

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 नहीं सुनी गई आवाज तो बढ़ेगा आंदोलन

कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। भोपाल के साथ-साथ सभी जिलों में कर्मचारियों ने मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी और मांगों से शासन को अवगत कराया है।



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