राजधानी भोपाल में बन रहे नगर निगम के नवीन मुख्यालय भवन को लेकर विधानसभा में सियासी संग्राम छिड़ गया है। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने सदन में करोड़ों रुपए के संभावित भ्रष्टाचार, निर्माण गुणवत्ता में लापरवाही और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए।नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में बताया कि नगर पालिका निगम भोपाल का नया मुख्यालय लिंक रोड नंबर-2, सेंट मैरी स्कूल के सामने, तुलसी नगर स्थित 4.21 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 72 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
22 करोड़ से 72 करोड़ तक कैसे पहुंची लागत?
जयवर्द्धन सिंह ने आरोप लगाया कि परियोजना का प्रारंभिक टेंडर 22 करोड़ 57 लाख रुपए का था, लेकिन बाद में लागत में बार-बार बढ़ोतरी की गई। नियमानुसार टेंडर राशि अधिकतम 20% तक ही बढ़ाई जा सकती है, अन्यथा दोबारा निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है। कांग्रेस विधायक का आरोप है कि इस नियम की अनदेखी कर निर्माण एजेंसी को लाभ पहुंचाया गया।
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गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि निर्माण कार्य में निम्न स्तर की सामग्री उपयोग किए जाने की शिकायतें हैं। फायर सेफ्टी जैसे अहम सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई है। इतना ही नहीं, इतने बड़े प्रशासनिक मुख्यालय में पर्याप्त मीटिंग हॉल का प्रावधान नहीं होना योजना की गंभीर खामी को दर्शाता है।
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टैक्स के पैसे का हिसाब दो
जयवर्द्धन सिंह ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच, थर्ड पार्टी ऑडिट और टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने साफ किया है कि यह मुद्दा सदन से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।