एमपी नगर इन दिनों विकास कार्यों की बजाय अव्यवस्था की पहचान बन गया है। सीवेज लाइन के लिए खोदी गई सड़कें 3 महीने बाद भी सुधार नहीं हुआ। धूल, गड्ढे और जाम से जूझ रहे लोग अब सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। एमपी नगर जोन-1 और 2 की लगभग सभी सड़कों को सीवेज लाइन डालने के लिए बीच से खोदा गया था। शुरुआत में लोगों को उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में सड़कें दोबारा ठीक कर दी जाएंगी, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। केवल मिट्टी डाल कर जिम्मेदार गायब हो गए हैं। दिनभर भारी ट्रैफिक के बीच जब वाहन गुजरते हैं तो धूल के बड़े-बड़े गुबार उड़ते हैं, जिससे आसपास की दुकानों, दफ्तरों और पैदल चलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का दर्द छलका

प्रदीप ठाकुर का कहना है कि सड़क खुदने के बाद से उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो गया है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऑटो चालक मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि खराब सड़कों और गड्ढों के कारण उन्हें बार-बार अपने वाहन के टायर बदलवाने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। व्यापारी बृजेश के अनुसार धूल इतनी ज्यादा उड़ती है कि दुकान पर बैठना मुश्किल हो गया है और सांस लेने में भी परेशानी होने लगी है। वहीं मुकेश लोधी का कहना है कि गड्ढों की वजह से छोटे-बड़े हादसे आम हो गए हैं। स्थानीय निवासी कौशल ने बताया कि पिछले तीन महीनों से वे इसी समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों का कोई असर नहीं हो रहा।

 21 दिन की समय सीमा के बाद भी नहीं हुआ काम पूरा

अमृत 2.0 योजना के तहत यह साफ प्रावधान है कि किसी भी सड़क को खोदने के बाद अधिकतम 21 दिनों के भीतर उसका रेस्टोरेशन किया जाना चाहिए। लेकिन एमपी नगर में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। यहां 2 से 3 महीने गुजर जाने के बावजूद सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जिससे साफ तौर पर नियमों की अनदेखी और कार्य में लापरवाही दिखाई दे रही है।

 बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद काम में देरी

इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत शहर में 984 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने, 10 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने और करीब 1.21 लाख घरों को नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। कागजों पर यह योजना शहर के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि काम अधूरा छोड़ दिया गया है और सड़कों की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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लगातार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने कई बार नगर निगम और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दी। कई लोगों का कहना है कि जब वे अधिकारियों से संपर्क करते हैं तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि पहले यह पता करें कि काम किस एजेंसी ने किया है, जिससे समस्या का समाधान और लंबा खिंचता जा रहा है।

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खुले गड्ढों और उड़ती धूल से हादसों का खतरा बढ़ा

सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे और लगातार उड़ती धूल न सिर्फ यातायात व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गए हैं। कई जगहों पर अचानक गड्ढे आने से वाहन चालक असंतुलित हो जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। वहीं धूल के कारण लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें भी होने लगी हैं।

 



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