भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक में मंगलवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लेकर लंबी चर्चा हुई। निगम प्रशासन की ओर से नए नियमों का प्रेजेंटेशन दिया गया, लेकिन पार्षदों ने जमीनी तैयारियों, संसाधनों की कमी और सफाई व्यवस्था की खामियों को लेकर कई सवाल खड़े किए।आईएसबीटी स्थित परिषद सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने की। नगरीय प्रशासन विभाग के विशेषज्ञ अतुल खरे ने नए नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि अब खुले में कचरा फेंकने या जलाने पर जुर्माना लगाया जाएगा। बड़े कचरा उत्पादकों (बल्क वेस्ट जनरेटर) को गीले कचरे का निपटान स्वयं करना होगा और उनकी निगरानी केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी सक्रियता
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 एक अप्रैल से प्रभावी हैं। कई राज्यों में इनके क्रियान्वयन में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में भोपाल नगर निगम ने विशेष बैठक आयोजित की।
पार्षदों ने उठाए जमीनी सवाल
बैठक के दौरान कई पार्षदों ने निगम की तैयारियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि शहर के कई वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कमी है और कचरा गाड़ियां खराब होने पर कई दिनों तक कचरा नहीं उठ पाता। ऐसे में नए नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा। नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में उनकी भूमिका निभा रहे पार्षद मोहम्मद सरवर ने कहा कि पॉलीथिन पर सख्ती के बिना नए नियम सफल नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि सूखा और गीला कचरा अलग-अलग उठाने के दावों के बावजूद कई इलाकों में स्थिति अलग दिखाई देती है। नालियों से निकला कचरा कई दिनों तक सड़कों पर पड़ा रहता है। पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान ‘गुड्डू’ ने कहा कि संसाधन और बजट की स्पष्ट जानकारी के बिना नियमों की चर्चा अधूरी है। उन्होंने बताया कि कई बार कचरा वाहन खराब होने पर पांच-पांच दिन तक कचरा नहीं उठता।
पार्षद विलास राव घाड़गे ने सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। वहीं देवेंद्र भार्गव ने नए नियमों का समर्थन करते हुए बड़े उद्योगों और संस्थानों पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात कही। कांग्रेस पार्षद देवांशु कंसाना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके वार्ड में आंधी से गिरा पेड़ हटाने में छह दिन लग गए। इससे व्यवस्थाओं की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पार्षद राजेंद्र चौकसे ने सरकारी आवासीय परिसरों में सफाई व्यवस्था कमजोर होने और कचरा वाहनों की कमी का मुद्दा उठाया।
महापौर ने किया निगम का बचाव
महापौर मालती राय ने कहा कि शहर में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो पार्षद नियमित रूप से अपने वार्डों में जाते हैं, उन्हें जमीनी स्तर पर हो रहे सुधारों की जानकारी है।
30 जून तक लागू होंगे नए नियम
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि नगर निगम 30 जून तक नए नियमों को लागू करने की दिशा में कार्रवाई करेगा। इसके लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें शहर से निकलने वाले कचरे की मात्रा, उसके निपटान और वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा।
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नए नियमों की प्रमुख बातें
– कचरे का स्रोत पर ही चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य।
– खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर जुर्माना।
– 100 या उससे अधिक लोगों के आयोजनों की पूर्व सूचना निगम को देना अनिवार्य।
– बल्क वेस्ट जनरेटर को गीले कचरे का स्वयं निपटान करना होगा।
– बड़े कचरा उत्पादकों का केंद्रीय पोर्टल पर पंजीयन।
– सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध का सख्ती से पालन।
– वार्डों की मासिक स्वच्छता रैंकिंग।
– स्कूलों और संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
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पहली बार नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में दिखे मोहम्मद सरवर
बैठक में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी पारिवारिक कारणों से शामिल नहीं हो सकीं। उनकी अनुपस्थिति में पार्षद मोहम्मद सरवर ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई और सफाई व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर निगम प्रशासन को घेरा।
