दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश की सड़कों तक पहुंच गया है। शनिवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा ने प्रदेशभर में कांग्रेस कार्यालयों के घेराव का आह्वान किया, जिसके तहत भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन हुआ और स्थिति टकराव में बदल गई। युवा मोर्चा के कांग्रेस कार्यालय पहुंचने से पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ता गेट पर एकत्र हो गए थे। दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई, जो बाद में धक्का-मुक्की और पथराव में बदल गई।
आमने-सामने आए कार्यकर्ता, हालात बिगड़े
भाजयुमो कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कांग्रेस कार्यालय के बाहर पहुंचे। जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में गेट के भीतर और बाहर जमा हो गए। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। धक्का-मुक्की के बाद हालात बेकाबू हो गए और लाठी-डंडे चलने तथा पत्थर फेंके जाने की घटनाएं सामने आईं। झड़प में भाजपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता घायल हुए। कुछ मीडियाकर्मियों को भी चोट आई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
भाजपा का आरोप- देश की छवि को ठेस
भाजयुमो नेताओं का कहना है कि दिल्ली में हुआ प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी कार्यक्रम को बाधित करने और देश की छवि खराब करने की कोशिश था। उनका आरोप है कि ऐसे मंच पर किया गया विरोध देश की तकनीकी उपलब्धियों को कमतर दिखाने वाला कदम है। प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।
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कांग्रेस का पलटवार-हमले का आरोप
कांग्रेस संगठन महामंत्री संजय कामले ने आरोप लगाया कि भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने पीसीसी कार्यालय में घुसने की कोशिश की और तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने पहले से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की होती तो हालात नहीं बिगड़ते। कांग्रेस नेताओं ने इसे सुनियोजित हमला बताते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने कहा कि भाजपा जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कांग्रेस नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यालय का घेराव करना चाहिए।
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सियासी तापमान चढ़ा
घटना के बाद भोपाल में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर उकसावे और हिंसा का आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली की घटना अब प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ले चुकी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
