भोपाल में गोमांस मिलने के मामले को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को नगर निगम के माता मंदिर स्थित मुख्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और गाय के पोस्टर लेकर पहुंचे और नगर निगम व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते सुबह करीब 11.30 बजे तक निगम कार्यालय में कामकाज ठप रहा।कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम के आधुनिक स्लॉटर हाउस से निकले वाहन में 26 टन मांस मिला, जिसमें गोमांस की पुष्टि हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार है, तब राजधानी भोपाल में गोमांस की बिक्री और तस्करी कैसे हो रही है।
बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अमित शर्मा ने कहा कि यह पूरा मामला बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। उन्होंने पूछा कि स्लॉटर हाउस से मांस से भरी गाड़ी बाहर कैसे निकली, ठेकेदार को टेंडर किसने दिलाया और किन लोगों को इस गोरखधंधे से फायदा पहुंचाया जा रहा था।
कांग्रेस ने मांग की कि दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ठेकेदार के घर और स्लॉटर हाउस पर बुलडोजर चलाया जाए तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
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कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी और मुख्यमंत्री व महापौर निवास का भी घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान स्थिति संभालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस का कहना है कि जब तक इस मामले में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।
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निगम के तर्क, जिम्मेदारी तय नहीं
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने रिपोर्ट के आधार पर स्लॉटर हाउस सील करने की बात कही है। वहीं अपर आयुक्त एवं गोवर्धन परियोजना के प्रभारी हर्षित तिवारी ने मांस के निपटान और बाहर ले जाने की प्रक्रिया को नियमों के तहत बताया। हालांकि निरीक्षण, रिकॉर्ड और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी, इस पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका है। चूंकि स्लॉटर हाउस का ठेका मेयर इन काउंसिल से स्वीकृत हुआ था, इसलिए महापौर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
