देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और नगर निगम पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि इंदौर को लगातार आठ बार मिले स्वच्छता सम्मान असल हालात को छिपाकर और कथित तौर पर कागजी खानापूर्ति के आधार पर हासिल किए गए।भोपाल स्थित आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा कि इंदौर की घटना किसी हादसे का नतीजा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र का परिणाम है। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और महापौर के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

नर्मदा जल तक को नहीं बचा पाई व्यवस्था

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश में नर्मदा को जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन सरकार की नाकामी ने पवित्र नर्मदा के पानी तक को प्रदूषित कर दिया। उनका आरोप था कि भाजपा सरकार असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दों को आगे बढ़ाती रही, जबकि जनता के बुनियादी अधिकार स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा हाशिये पर चले गए।

सवालों के घेरे में आठ स्वच्छता अवॉर्ड

सिंघार ने पूछा कि जिस शहर में नलों से जहरीला पानी पहुंच रहा हो, वहां इंदौर को आठ बार स्वच्छता पुरस्कार कैसे मिल गए? उन्होंने दावा किया कि नगर निगम और प्रशासन के अधिकारी जानते हैं कि इन अवॉर्ड्स के लिए किस तरह दस्तावेज तैयार किए गए। यदि सब कुछ सही था, तो फिर दूषित पानी पीने से लोगों की जान क्यों गई?

पीड़ितों तक पहुंचने से रोका गया

नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि इंदौर में प्रशासनिक निष्पक्षता खत्म हो चुकी है। जब वे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, तो प्रभावित इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार मौतों की वास्तविक संख्या और मुआवजे से जुड़ी सच्चाई छिपाना चाहती है।

मल-मिला पानी सप्लाई करने का आरोप

भागीरथपुरा क्षेत्र का हवाला देते हुए सिंघार ने कहा कि करीब दो हजार लोग दूषित पानी से प्रभावित हुए हैं। सरकारी जांच में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जो मल में पाए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार लोगों को सीवेज मिला पानी पिला रही थी? साथ ही याद दिलाया कि 2018 में सीएजी ने भी पानी के सैंपल में गड़बड़ी को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

टेंडर और कमीशन के आरोप

सिंघार ने दावा किया कि पिछले ढाई साल से पाइपलाइन से जुड़े काम कमीशनखोरी के कारण अटके रहे। उन्होंने सवा सौ करोड़ रुपए के कथित फर्जी टेंडर और बिलों का जिक्र करते हुए कहा कि एक ही दिन में कई किलोमीटर सीवेज लाइन डालने जैसे अव्यावहारिक दावे किए गए और फिर भी भुगतान कर दिया गया।

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मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने महापौर, नगरीय प्रशासन मंत्री, इंदौर के प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सत्ता के साथ जवाबदेही भी आती है। इतनी मौतों के बाद भी अगर संवेदनाएं नहीं जागीं, तो जनता के सवालों का जवाब कौन देगा? अन्य इलाकों में भी खतरा सिंघार के मुताबिक कनाडिया, भूरी टेकरी, आजाद नगर, खजराना, कृष्णबाग और बर्फानी धाम जैसे इलाकों में हालात चिंताजनक हैं। टैंकर से सप्लाई हो रहे पानी का पीएच लेवल नौ से ऊपर है और दूषित पानी से लोगों को किडनी जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। बोरिंग के पानी में भी सीवेज मिलने की बात सामने आ रही है।

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प्रदेशव्यापी वॉटर ऑडिट की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि इंदौर के साथ-साथ भोपाल और अन्य शहरों में भी वॉटर ऑडिट कराया जाए। उन्होंने जनता से अपील की कि केवल नगर निगम पर निर्भर न रहें और अपने घर के पानी की जांच खुद कराएं। सिंघार ने मृतकों के परिजनों को दो करोड़ रुपए की सहायता देने की मांग करते हुए कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि इंसानियत के खिलाफ अपराध है।

 

 



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