राजधानी भोपाल की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़ा तालाब के वेटलैंड एरिया में अतिक्रमण हटाने की मुहिम एक बार फिर तेज कर दी गई है। सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक के बाद टास्क फोर्स को चार दिन के भीतर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में लाल निशान लगाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। लेकिन कार्रवाई की इस तस्वीर का दूसरा पहलू कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक ओर झुग्गियों और छोटे निर्माणों पर तेजी से निशान लगाए जा रहे हैं, वहीं एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से सटे बड़े फार्महाउस, आलीशान मकान और व्यावसायिक निर्माणों पर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नजर नहीं आ रही। गोरा गांव से सूरज नगर के बीच कई बड़े निर्माणों में काम जारी है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इन स्थलों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही लाल निशान दिखाई दे रहे हैं।

केवल झुग्गियों को किया जाता है टारगेट 

इस मामले के पेटीशनर और पर्यावरणविद् राशिद नूर ने खुलकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, हर बार जब बड़ा तालाब बचाने की बात होती है, तो सबसे पहले झुग्गियों को टारगेट किया जाता है। छोटे लोगों के घरों पर बुलडोजर चल जाता है, लेकिन बड़े फार्महाउस, रेस्टोरेंट और आलीशान मकान जस के तस खड़े रहते हैं। यह दोहरा रवैया क्यों?  

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याचिकाकर्ता को रखा गया दूर 

राशिद नूर ने आगे कहा के मैं इस मामले का याचिकाकर्ता हूं। एनजीटी के आदेशों के बाद भी मुझे टास्क फोर्स में शामिल नहीं किया गया और न ही बैठकों में बुलाया गया। इससे शंका पैदा होती है कि कहीं प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही। अगर कानून सबके लिए बराबर है, तो कार्रवाई भी बराबर दिखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कई बार सर्वे हुए, सूची बनी, लेकिन जमीन पर कार्रवाई सीमित ही रही। हर बार कुछ झुग्गियां हटाकर संदेश दे दिया जाता है कि काम हो गया। लेकिन असल में बड़े निर्माण लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बड़ा तालाब सिर्फ कागजों में संरक्षित है, जमीन पर नहीं।

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मैरिज गार्डन की 150 मीटर लंबी बाउंड्रीवॉल पर कार्रवाई

 प्रशासन का कहना है कि एनजीटी के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जानी है। सांसद आलोक शर्मा और कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह की समीक्षा के बाद अभियान को गति दी गई है। शनिवार को कार्रवाई की गई है। बैरागढ़ एसडीएम और तहसीलदार ने एक मैरिज गार्डन की 150 मीटर लंबी बाउंड्रीवॉल, दो पक्के निर्माण पर जेसीबी चलवाई। इससे पहले बैरागढ़ वृत्त में तीन दिन में 40 से ज्यादा निर्माण पर लाल निशान लगाए गए थे। दरअसल 16 मार्च 2022 को वेटलैंड से जुड़ा कानून लागू होने के बाद शहरी क्षेत्र में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर के दायरे में हुआ कोई भी नया निर्माण अवैध माना जाएगा।



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