रेल मार्ग से प्रतिबंधित वन्यजीवों की तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पटना-इंदौर एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 19322) में कार्यरत एच-1 कोच के अटेंडेंट को 311 जीवित कछुओं के साथ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने पकड़ा है। यह कार्रवाई 3 फरवरी को ट्रेन की नियमित जांच के दौरान की गई, जिससे वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की आशंका गहराई है। आरपीएफ पोस्ट संत हिरदाराम नगर के प्रभारी जसराम गूज के निर्देशन में सहायक उप निरीक्षक हेमंत कुमार राजपूत एवं आरपीएफ जवान आर. जॉनी कुमार ने ट्रेन के एच-1 कोच की जांच की।
इस दौरान कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। शक के आधार पर जब उसके पास मौजूद दो बैगों की तलाशी ली गई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। दोनों बैगों में बड़ी संख्या में छोटे-छोटे जीवित कछुए ठूंस-ठूंसकर भरे हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अटेंडेंट को तुरंत ट्रेन से उतारकर आरपीएफ पोस्ट संत हिरदाराम नगर लाया गया। वहां बैगों की विधिवत गिनती करने पर कुल 311 जीवित कछुए पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह प्रतिबंधित वन्यजीवों का अवैध परिवहन है। इसके बाद तत्काल वन विभाग भोपाल को सूचना दी गई।
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वन विभाग को सौंपे गए कछुए, जांच शुरू
सूचना मिलते ही वन विभाग के एसडीओ विनोद सिंह अपनी टीम के साथ आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। वन विभाग द्वारा की गई जांच में कछुओं की पहचान इंडियन टेंट टर्टल के रूप में की गई, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इन कछुओं का इस तरह परिवहन और व्यापार पूरी तरह गैरकानूनी है। वन विभाग ने आरोपी अजय सिंह राजपूत को 311 कछुओं सहित अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पकड़े गए सभी कछुओं को सुरक्षित रूप से वन विभाग के संरक्षण में रखा गया है, ताकि उन्हें उचित देखभाल और प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखा जा सके। इस घटना ने एक बार फिर रेल मार्ग से हो रही वन्यजीव तस्करी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरपीएफ और वन विभाग की तत्परता से भले ही इस खेप को पकड़ लिया गया हो, लेकिन यह मामला संगठित तस्करी नेटवर्क की ओर भी इशारा कर रहा है।
