ख्यात गायिका आशा भोसले का रविवार को मुंबई में निधन हो गया। अपनी बड़ी बहन लता की तरह उनकी जन्मस्थली तो इंदौर नहीं रही, लेकिन उनके बचपन की यादें इंदौर से जुड़ी थीं। उनका बचपन छावनी के मुराई मोहल्ला में गुजरा। वे अक्सर इंदौर आती रहती थीं। मंगेशकर परिवार के रिश्तेदार इंदौर में रहते थे। उनका कहना है कि दोनों का स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। आशा का मजाकिया अंदाज रहता था और लता जी शांत स्वभाव की थीं।
सीहोर के शरबती गेहूं की रोटी पसंद थी
इंदौर निवासी रिश्तेदार मनोज बिनीवाले बताते हैं कि जब भी मुंबई में हम आशाजी के यहां जाते थे तो इंदौर का नमकीन ले जाना नहीं भूलते। उन्हें सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां अच्छी लगती थीं। इंदौर से गेहूं की बोरियां मैं खुद कई बार पहुंचाने जाता था।
पढ़ें: एफआईआर के बाद समझौते पर हाईकोर्ट सख्त, उद्योगपति महेश केमतानी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना
17 साल पहले इंदौर आई थीं
आशा आशाजी 17 साल पहले एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर आई थीं। तब वे सयाजी होटल में रुकी थीं। उन्होंने इंदौर निवासी रिश्तेदारों को फोन किया और घर का खाना खाने की इच्छा जताई। मनोज बताते हैं कि हम उनके लिए घर से खाना तैयार कर टिफिन में ले गए। बचपन में वे सराफा चौपाटी भी जाती थीं। वे खाने की शौकीन तो थीं, उन्हें नए-नए व्यंजन बनाना भी खूब पसंद था। आपको बता दें कि आशा के पिता दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी थी। वह उनके साथ इंदौर आए थे और एक साल इंदौर में रुके थे। उस दौरान लता का जन्म इंदौर में हुआ था।