विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कुलाधिपति एवं राज्यपाल पटेल ने कहा कि इस समारोह में शामिल होकर उन्हें अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि उज्जैन नगरी में प्रवेश करते ही एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाला एक विद्यार्थी आज प्रदेश का मुख्यमंत्री बना है।



राज्यपाल ने बताया कि पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन वे महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां से उन्हें प्रदेश के विकास और देश की प्रगति के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन ज्ञान, विज्ञान और ध्यान का वैश्विक केंद्र रहा है। भगवान श्री कृष्ण ने भी इसे अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना था। यह भूमि सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है, जो शौर्य, सुशासन और न्यायप्रियता के प्रतीक माने जाते हैं।



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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सात दशकों के समर्पण का परिणाम है, जिसने देश-दुनिया को कुशल मानव संसाधन प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जुड़े इस विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है। समारोह में कुल 397 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें 181 को डिग्री, 198 को गोल्ड मेडल, एक शोधार्थी को डी.लिट. और 88 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।



मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय को विभिन्न उपकरणों के लिए 51 लाख रुपये, कृषि अध्ययनशाला के लिए पांच ड्रोन तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण हेतु एक बस प्रदान करने की घोषणा की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य, विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, शिक्षक, अतिथि शिक्षक, उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।




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