राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में एक निजी बैंक के कर्मचारी द्वारा समूह लोन लेने वाली 31 महिलाओं से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपी कर्मचारी ने महिलाओं से ऋण की किश्तों के रूप में वसूली गई राशि बैंक में जमा करने के बजाय खुद हड़प ली और फरार हो गया। ठगी की कुल रकम करीब 1 लाख 13 हजार रुपये बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी पवन गोस्वामी को बैंक द्वारा गांव-गांव जाकर समूह लोन की किश्तें वसूलने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह नियमित रूप से महिलाओं के घर जाकर किश्त की रकम लेता रहा। महिलाएं उसे बैंक का अधिकृत कर्मचारी मानती थीं और उन्हें पूरा भरोसा था कि उनकी जमा की गई रकम सुरक्षित रूप से बैंक खाते में दर्ज हो रही है।

दूसरा कर्मचारी रिकवरी करने पहुंचा, तब हुआ खुलासा


मामले का खुलासा उस समय हुआ जब बैंक की ओर से लोन रिकवरी के लिए एक अन्य कर्मचारी महिलाओं के घर पहुंचा। तब महिलाओं को पता चला कि उनकी कई किश्तें बैंक रिकॉर्ड में बकाया दर्शाई जा रही हैं। इस पर महिलाओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद जांच में गबन की सच्चाई सामने आई। घटना के बाद से आरोपी कर्मचारी बैंक आना बंद कर चुका है और फरार बताया जा रहा है। बैंक मैनेजर वशीम कुरैशी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

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महीनों तक नहीं चला गबन का पता, उठे सवाल


इस घटना ने बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महीनों तक किश्तों की राशि जमा न होने के बावजूद बैंक को इसकी भनक कैसे नहीं लगी? साथ ही यह भी चिंता का विषय है कि यदि आरोपी पकड़ा जाता है, तो क्या पीड़ित महिलाओं को उनकी मेहनत की कमाई समय पर वापस मिल पाएगी। सरकार और बैंकिंग संस्थानों द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर ऐसे मामलों से भरोसा कमजोर होता है।



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