शिवपुरी जिले के लुकवासा में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान एक प्रशासनिक संबोधन ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम में कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा “महाराज साहब” संबोधन इस्तेमाल करने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।

शनिवार को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। केंद्रीय मंत्री सिंधिया स्वयं लोगों से आवेदन ले रहे थे और उन्हें एक बैग में एकत्र कर कलेक्टर को सौंप रहे थे। इसी दौरान कलेक्टर अर्पित वर्मा ने माइक पर घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई आवेदक रह गया हो, तो वह “महाराज साहब” को आवेदन दे सकता है।

इस संबोधन के बाद कार्यक्रम स्थल पर हलचल मच गई और मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने कहा कि “देश को आजाद हुए 75 साल से अधिक हो गए, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की भाषा में अब भी सामंतवादी मानसिकता झलकती है। एक आईएएस अधिकारी द्वारा मंच से ‘महाराज साहब’ कहना प्रशासनिक गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संवैधानिक पदों के अनुरूप संबोधन होना चाहिए, न कि रियासतकालीन परंपराओं के आधार पर।

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वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर-चंबल अंचल में सिंधिया परिवार को ‘महाराज’ कहकर संबोधित करना परंपरा और सम्मान का प्रतीक है। इसे सामंतवाद से जोड़ना उचित नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक मर्यादा और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करने की भाषा पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी मंचों पर अधिकारियों को केवल संवैधानिक और औपचारिक संबोधन का ही उपयोग करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या विवाद न हो।

लुकवासा में मौजूद लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ ने इसे सामान्य सम्मान बताया, जबकि युवाओं का एक वर्ग इसे बदलते समय के अनुरूप अनुपयुक्त मान रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद “महाराज साहब” ट्रेंड करने लगा है। फिलहाल कलेक्टर अर्पित वर्मा की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह संबोधन स्थानीय परंपरा और सम्मानवश किया गया था, इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा नहीं थी।



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