मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 बैच के आठ युवा आईएएस अधिकारियों की पहली फील्ड पोस्टिंग ऐसे जिलों में की है, जिन्हें प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन अधिकारियों को सहायक कलेक्टर के रूप में आदिवासी बाहुल्य और चुनौतीपूर्ण जमीनी प्रशासन वाले जिलों में तैनात किया गया है। इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक सोच और जमीनी शासन मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में प्रथम चरण का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन अधिकारियों को अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भेजा गया है, जहां वे सीधे आम लोगों की समस्याओं, ग्रामीण प्रशासन, राजस्व मामलों और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ेंगे। सरकारी आदेश के मुताबिक, इन अधिकारियों को 17 अप्रैल 2026 को मसूरी स्थित अकादमी से कार्यमुक्त किया गया था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने उनकी जिलावार पदस्थापना आदेश जारी किए।
आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस
जिन जिलों में इन अधिकारियों को भेजा गया है, उनमें झाबुआ, बड़वानी, बैतूल, मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले शामिल हैं, जबकि धार, सिंगरौली, कटनी और खंडवा भी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन जिलों में काम करने से युवा अधिकारी जमीनी हकीकत, ग्रामीण विकास, आदिवासी कल्याण और प्रशासनिक चुनौतियों को करीब से समझ सकेंगे। जानकारों का मानना है कि शुरुआती दौर में कठिन और फील्ड आधारित जिलों में तैनाती से अधिकारियों का अनुभव मजबूत होता है और वे भविष्य में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं।
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किसे कहां मिली जिम्मेदारी
आयुषी बंसल – सहायक कलेक्टर, झाबुआ
आशी शर्मा – सहायक कलेक्टर, धार
माधव अग्रवाल – सहायक कलेक्टर, बड़वानी
सौम्या मिश्रा – सहायक कलेक्टर, सिंगरौली
श्लोक वाइकर – सहायक कलेक्टर, कटनी
शिल्पा चौहान – सहायक कलेक्टर, खंडवा
पुष्पराज नानासाहेब खोट – सहायक कलेक्टर, बैतूल
शैलेंद्र तिवारी – सहायक कलेक्टर, मंडला
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टॉप रैंकर्स आयुषी बंसल और माधव अग्रवाल भी शामिल
इस सूची में यूपीएससी के टॉप रैंकर्स भी शामिल हैं। झाबुआ भेजी गईं आयुषी बंसल ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-7 हासिल की थी, जबकि माधव अग्रवाल ने ऑल इंडिया रैंक-16 प्राप्त की थी। यह फैसला साफ संकेत देता है कि राज्य सरकार युवा अधिकारियों को शुरुआत से ही फील्ड प्रशासन का मजबूत अनुभव देना चाहती है, ताकि वे भविष्य में अधिक संवेदनशील और परिणाम आधारित प्रशासनिक नेतृत्व दे सकें।
