शहर में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। हालांकि, लगातार जारी सख्ती के बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों की संख्या में गिरावट नहीं देखी जा रही है। इंदौर पुलिस द्वारा संचालित विशेष अभियान के तहत बीते सवा साल के भीतर की गई कार्रवाई ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के माध्यम से सरकारी खजाने में 37 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा होने की स्थिति बन गई है।

डेढ़ साल से निरंतर जारी है पुलिस का विशेष चेकिंग अभियान

इंदौर पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और नशे की हालत में होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पिछले डेढ़ वर्षों से यह अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2025 से लेकर 19 अप्रैल 2026 के मध्य कुल 37,658 चालान काटे गए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के तहत न्यूनतम 10 हजार रुपए प्रति चालान की दर से यह कुल राशि 37 करोड़ रुपए से ऊपर निकल गई है। आंकड़ों में एक चिंताजनक पहलू यह भी है कि वर्ष 2025 में कुल 23,049 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2026 के शुरुआती साढ़े तीन महीनों में ही चालानों की संख्या 14,609 तक पहुंच चुकी है। यह दर्शाता है कि पुलिस की कड़े रुख के बाद भी वाहन चालक अपनी आदतों में सुधार नहीं कर रहे हैं।

वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही बढ़ी चालानों की रफ्तार

अगर केवल मौजूदा वर्ष 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मात्र साढ़े तीन महीने की अवधि में पुलिस ने पिछले दो वर्षों के संयुक्त आंकड़ों से भी अधिक चालान बना दिए हैं। 1 जनवरी 2026 से 19 अप्रैल 2026 के बीच ही ड्रिंक एंड ड्राइव के 14,609 मामले सामने आए हैं। यह गति बताती है कि शहर की सड़कों पर देर रात चेकिंग कितनी सघन कर दी गई है।

वर्ष 2025 में दर्ज की गई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

विगत वर्षों की तुलना करने पर पता चलता है कि साल 2025 में इस अभियान के तहत सबसे अधिक कार्रवाई की गई। वर्ष 2023 में जहां पुलिस ने 5,964 चालान बनाए थे और वर्ष 2024 में 6,572 चालान किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या अचानक बढ़कर 23,049 हो गई। पिछले वर्षों के मुकाबले यह वृद्धि लगभग चार गुना अधिक दर्ज की गई है, जिससे साफ है कि इंदौर पुलिस ने देर रात सड़कों पर निगरानी काफी बढ़ा दी है।

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कड़े प्रावधान

शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाती है। इस नियम के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की सांस में अल्कोहल की मात्रा 30एमजी/100एमएल से अधिक पाई जाती है, तो वह दंड का पात्र होता है। पहली बार पकड़े जाने पर आरोपी को 6 माह तक की जेल और 10,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। वहीं दूसरी बार अपराध दोहराने पर जेल की अवधि 2 वर्ष तक और जुर्माना 15,000 से 30,000 रुपए तक हो सकता है। पकड़े गए वाहनों को छुड़वाने के लिए न्यायालय में सुपुर्दगीनामा पेश करना होता है, जिस पर अंतिम निर्णय कोर्ट का होता है।

त्यौहारों और सप्ताहांत पर बढ़ता है नियमों का उल्लंघन

शहर के 32 थानों द्वारा प्रतिदिन रात 11 बजे से 1 बजे के बीच अलग-अलग चेकिंग पॉइंट्स पर वाहनों की जांच की जाती है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक उल्लंघन त्योहारों और वीकेंड के दौरान देखने को मिलता है। हालांकि कागजी आंकड़ों के इतर कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जहां चालक आपसी साठगांठ या रसूख का इस्तेमाल कर बच निकलने की कोशिश करते हैं। चेकिंग के दौरान कई बार 500 से 2000 रुपए के बीच अवैध लेनदेन की चर्चाएं भी रहती हैं।

चेकिंग पॉइंट्स पर रसूखदारों का हस्तक्षेप और विवाद अक्सर सामने आते हैं

सड़कों पर की जाने वाली इस कार्रवाई के दौरान अक्सर विवाद की स्थितियां निर्मित होती हैं। पकड़े जाने पर कई वाहन चालक खुद को बचाने के लिए रसूखदार नेताओं या वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात करवाने का प्रयास करते हैं। कई मौकों पर राजनेता अपने समर्थकों को छुड़ाने के लिए स्वयं चेकिंग पॉइंट पर पहुंच जाते हैं, जिससे पुलिस और नागरिकों के बीच तीखी बहस होती है। ऐसे विवादों के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहते हैं।



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