भोपाल में एक कथित वायरल पत्र को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पत्र के बाद पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। उनका कहना है कि पहले सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से चार को छोड़ दिया गया, लेकिन तीन अभी भी करीब 27 घंटे से पुलिस के पास हैं। उन्होंने कहा कि बिना ठोस कारण इस तरह हिरासत में रखना उचित नहीं है और इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।


फर्जी बताए जाने के बाद भी एक्शन पर बहस

तन्खा का कहना है कि यह पत्र कई दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल था और लाखों लोग इसे साझा कर चुके थे। बाद में इसे फर्जी बताया गया, ऐसे में केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई करना सवाल खड़े करता है।

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कांग्रेस का आरोप- दबाव की राजनीति

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया। उनके अनुसार, पत्र में उठाए गए मुद्दों से सत्तारूढ़ दल असहज है, इसलिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने सवाल उठाया कि जब वही सामग्री बड़ी संख्या में लोगों ने शेयर की, तो कार्रवाई चुनिंदा लोगों पर ही क्यों। वहीं पार्टी प्रभारी हरीश चौधरी ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की है।

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वसुंधरा राजे की सफाई

इस पूरे विवाद पर वसुंधरा राजे ने प्रतिक्रिया देते हुए वायरल पत्र को खारिज किया है। उन्होंने इसे “शुभचिंतकों की कारगुजारी” बताते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार के प्रयासों का समर्थन किया जाना चाहिए।

 



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