मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर बाल दिवस पर गुरुद्वारा हमीदिया रोड में मत्था टेका और सिख वीर साहिबजादों की शहादत को नमन किया। उन्होंने कहा कि सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए साहिबजादों के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि गुरु गोबिंद सिंह और उनके परिवारों की वीरता की गाथाओं को राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। वीर बाल दिवस दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह के छोटे बेटों, साहिबजादा फतेह सिंह और जोरावर सिंह की शहादत की याद दिलाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि साहिबजादों ने बहुत छोटी उम्र में अन्याय के सामने झुकने से इंकार किया और धर्म व सच्चाई की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस का परिचय दिया। उनका जीवन आज के युवाओं के लिए हिम्मत, ईमानदारी और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ कीर्तन का श्रवण किया और उन्हें स्नेह दिया। गुरुद्वारे में बच्चों द्वारा कीर्तन दरबार संचालित किया गया और चित्र प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार भोपाल में गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के आयोजन में सहयोग प्रदान करेगी। वीर बाल दिवस के अवसर पर पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साहिबजादों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। संत सिपाहियों ने अखाड़ा गत्तका प्रदर्शन किया। वरिष्ठ विधायक और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सिख वीरों ने देश की आजादी और धर्म की रक्षा में अद्वितीय योगदान दिया। अरेरा कॉलोनी गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष पजिंदर सिंह ने बताया कि सिख गुरुओं ने मुगलों और अंग्रेजों का मुकाबला करने के लिए वीर फौज बनाई और खालसा पंथ की स्थापना की।

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इस अवसर पर सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, जिलाध्यक्ष रवीन्द्र यती, वरिष्ठ समाजसेवी नेहा बग्गा सहित समाज के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिख वीरों के आदर्श और बलिदान युवा पीढ़ी को धर्म और देश की रक्षा के लिए प्रेरित करते रहेंगे और उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। इस तरह वीर बाल दिवस सिख धर्म की वीरता, धर्मनिष्ठा और साहस की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन गया है।

 



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